Saturday 16 January 2010

A narrow escape...

अभी अभी घर आया हु, और सबसे पहले गुरु महाराज परिवा राउर आप चाहने वालो का शुक्रिया अदा करना चाहूँगा की पता नहीं किसकी किस्मत से आज यहाँ सही सलामत हूँ..दोस्तों लोग मौत को लेकर तमाम तरह की बाते करते है, तमाम कहानिया सुनते है , सुनकर मजा भी आता है और कभी कभी मुह से निकल भी जाता है की मै "मौत से नहीं डरता" लेकिन सचमुच मौत से सामना होने पर कैसा लगता है मुझे आज महसूस हुआ..
आज मै और मेरे मित्र सोहेल भाई ने कुछ काम से पैरिस से उत्तरी फ्रांस के एक कसबे में जाने का प्रोग्राम बनाया, हमने सुबह ७ बजे से अपना सफ़र शुरू किया , जबकि सडको पर अभी काफी अँधेरा था और लोग बाग़ अपने काम पर जाने की जल्दी में दिख रहे थे, पैरिस में तापमान ६ डिग्री के आस -पास था जो की पिछले कई दिनों की तुलना माँ काफी सुहावना था, हमने कार गरम की और बहुत ही खुले मौसम में निकल गए, लेकिन जैसे ही पैरिस से आगे बढे मौसम बदलने गया , कोहरा घना होता गया , कसबे आने पर कोहरा थोडा कम रहता और फिर बढ़ जाता , लेकिन जैसे की फ्रांस के लोगो को कानून पालन के लिए आस-पास पुलिस की मौजूदगी की जरुरत नहीं होती तो सफ़र अच्छे से चलने लगा, हमने दुरी कम करने के लिए नेशनल रुट लिया, और एक जगह रुक कर एक खुबसूरत फ्रेंच लड़की के यहाँ कैफे पीकर आगे बढे , शहर से थोडा आगे बढे न पर हमने एक रोड पकड़ी जहा की अधिकतम गति सीमा १३० किमी/ घंटे थी..बहुत ही जल्दी कोहरे और ठण्ड के बावजूद (पैरिस से थोडा सा बढ़ते ही तापमान घटने लहगा और फाइनली १ डिग्री हो गया..) हमने जल्दी ही १०० से ज्यादा किमी का सफ़र तय कर लिया, फिर जंगली इलाका शुरू हो गया लेकिन गाडियों क गति ११० से १२० ही थी..इसी बीच जंगल में कुछ दिखा और कुछ देखने में सोहेल भाई का ध्यान सेकंड के कुछ हिस्सों के लिए बटा और हमारी गाड़ी सीधे कच्ची सड़क पर आ गयी और १२० की स्पीड में ब्रेक लगने पर और फिसलते हुए खाई और जंगलो की तरफ जाने लगी..फिर हमारी आँखे तो खुली रही , लेकिन हमारे दिलाग बंद हो गए, क्या हुआ , कैसे हुआ और कैसे ब्रेक लगा कुछ पता नहीं चला और गाड़ी कच्ची सड़क से पूरी आवाज़ में चीखते हुए एक अर्धचन्द्राकार आकर बनती हुई रोड पर आअकर खड़ी हो गयी और असली खतरा अब , पिच्छे से १०० से ज्यादा की स्पीड में गाडियों की लाइन लगी हुई थी और अगर इश्वर की कृपा न होती और पीछे कोई बड़ी गाड़ी यह ट्रक होती तो हमें एक बहुत ही बुरी मौत से कोई नहीं bacha पता..लेकिन पीछे एक मेडिकल की गाड़ी थी उन्होने रोक कर सारा त्रफ्फिक रोक दिया lekin..उन कुछ सेकेंड्स में पूरी जिंदगी, सारा परिवार, आँखों के सामने घूम गया, लगा भगवान आज आपने नयी जिंदगी दी है...आज अहसास हुआ की सचमुच जिंदगी कितनी अनमोल होती है अहसास तब होता है जब ये छोटने लगती है...इन्ही शुभकामनाओं के साथ की इश्वर इसी तरह सबकी मदद करे....आपका -अजित

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