Wednesday 17 March 2010





कौन सा ऐसा इंसान होगा जिसकी आँखे में ये दृश्य देखकर पानी न उतर आये,सिवाय उसके जिसके आँखों का पानी सूख चूका हो या जो आज तक माँ बना इ का या फिर कुपोषण का दर्द न जानते हो, ये दृश्य है उस प्रदेश की बदहाली का जिस प्रदेश की महिला मुख्यमंत्री करोडो की माला पहनकर इठलाती है, जो भारत की सबसे ज्यादा कमानेवाली महिला बन चुकी है और जिसके चमचे और वफादार नस्ल की सरकारी मशीनरी दो दिन के अपने व्यक्तिगत, निजी आयोजन पर जनता के 250 करोड़ फूक डालते है,

ये दृश्य है उस प्रदेश का जहा की मुख्यमंत्री , सदियों से दबे कुचले , दलित और कुपोषित का नाम लेकर सत्ता में आयी और आज उन्ही का खून चूस कर उन्हे इस हालत पंहुचा दिया..ये दो दृश्य दिखाते है की आज क्या हालत कर दी है एक महिला की मुर्खता और उसके चाटुकारों की दौलत की हवस ने,

ये सिर्फ एक कुपोषित बच्चा नहीं है, बल्कि एक कुपोषित लोकतंत्र है, जो ऐसी जाहिल, निकम्मी और जोंक सरकार को सत्ता में बैठा देती है ; जो जवाब मांगने पर लाठिय और गोलिया चलवाती है, जिसके लिए मुर्तिया जिन्दा इंसानों से ज्यादा महत्वपूर्ण है और जो अपने निचे से फिसलती हुई सत्ता को देख रही है

मायावती की बहुप्रचारित राष्ट्रीय रैली पूरी तरह से फ्लाप हो गयी है. मायावती के समर्थकों ने दावा किया था कि रैली में 20 से 25 लाख लोग आ सकते हैं लेकिन रैली में पांच से छह लाख लोग ही आ सके. इसमें भी उत्तर प्रदेश से ज्यादा लोग महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश से आये. खबर है कि मायावती ने इस असफलता का संज्ञान लेते हुए समीक्षा करने का फैसला किया है रैली के आयोजन पर ही 200 से 250 करोड़ रूपये खर्च किये गये. रमाबाई अंबेडकर पार्क में आयोजन स्थल पर किये गये खर्च के अलावा परिवहन और प्रचार पर भी जमकर खर्च किया गया. मायावती प्रशासन द्वारा रैली को सफल बनाने के लिए पूरे प्रदेश को पंगु बना दिया गया था. सारे रास्ते रमाबाई अंबेडकर पार्क की ओर ही मोड़ दिये गये थे लेकिन आनेवालों की उदासी ने मायावती को मायूस कर दिया होगा.

"मनी, मीडिया और माफिया से सावधान" कहे वाली मायावती से ये पूंछो की गले में पड़ा १००० के नोटों का हार क्या मणि नहीं है और पार्टी में कितने माफिया हैं | सूप बोले सूप बोले चलनी क्या बोले जिसमे ७२ छेद.


ये रैली का फ्लॉप होना सिर्फ रैली का फ्लॉप होना नहीं है, ये फ्लॉप होना है मायामुर्ती की महत्वाकान्छाओं के, उनके प्रधानमंत्री बना इ के सपने का, उसकी जनता की खून छोस कर रैली और जन्मदिन मानाने वाली नीतियों का.

ये फ्लॉप होना है उस सरकारी बेशर्मी, उस सरकारी गुंडा गर्दी का की केंद्र के पैसे से बनाये गए पूल का उद्घाटन एक गुंडा मंत्री कर देता है, जो अलीगढ में लड़ते मरते , हिन्दू मुस्लिमो को समझाने उनकी समस्या को दूर करने के बजाय अपने रैली में सरकारी मचिनारी को घुलाम बनाए का .. ये फ्लॉप होना है उस मानसिकता का जो वोटर्स को अपना मानसिक गुलाम समझ लेती है.

ये फ्लॉप होना है लोकतंत्र की हत्यारी सरकार का, ये फ्लॉप होना है नकली सोशल इंजिनीअरिंग का, और सबसे बड़ी और अच्छी बात ,ये फ्लॉप होना है उत्तर प्रदेश के दुर्भाग्य का.

4 comments:

  1. यह विचित्र है कि नोटों की माला धारण की मुख्यमंत्री मायावती ने, लेकिन उसके दुष्परिणाम भुगतने पड़ रहे हैं उनके अफसरों को। इस मामले में जिस तरह कुछ अधिकारियों को हटाया गया उसका औचित्य समझना कठिन है।

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  2. पहले बसपा की कर्नाटक इकाई के प्रवक्ता को इसलिए हटाया गया कि उन्होंने यह स्पष्टीकरण क्यों दिया कि नोटों की माला उनके राज्य से नहीं आई और अब कुछ अधिकारियों को इस आधार पर हटा दिया गया, क्योंकि मीडिया में माला का मामला तूल पकड़ गया। यह मसला तो तूल पकड़ना ही था, क्योंकि नोटों की माला पहनना कोई अनुचित कृत्य हो, ऐसा आचरण भी नहीं जिसकी मुक्तकंठ से सराहना की जाती।

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  3. कुछ नहीं भाई भारत मे एक कोम्मुनिस्ट रिवोलुसन की जरुरत है बाकि कुछ नहीं है ...जब तक कोई अच्चा साम्यवादी नेता भारत मे पैदा नहीं होगा तब तक ये बंदरो का छला कूद चालू ही रहेंगा ....इस लिए एक बार क्रांति की जरुरत है...........

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  4. raj ji

    aapki baat se poorn sahmat hun

    mujhe to BABA RAMDEV JI hi ekmatr roshni ki kiran dikhayi de rahe h

    shayad kuch parivartan ki hava chale or sacchai ki fasal mahke fir se

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