Sunday, February 24, 2013

एक समाजवादी बजट


समाजवादी पार्टी ने हमेशा से ही किसानों, मज़दूरों और नौजवानों का हितैषी होने कि बात कही है और समाजवादी पार्टी के दुसरे बजट में जिस तरह से उनंहे केन्द्र में रक्खा गया है उससे कही कोई शक़ नही राह जाता कि हमारे युवा मुख्यमंत्री परम्परा और आधुनिकता का अनूठा संगम है; एक ऐसा इनसान जो जितनी आसानी से लैप्टॉप और टेबलेट चला सकता है उतनी ही आसानी से ट्रैक्टर और हल भी चला सकता है....

जो ग्लोबल समित कराकर उद्योगपति बुला सकता है तो किसानों का दर्द समझकर  नहरो में पानी और केंद्रों पर खाद भी पहुँचवा सकता है.....

ईश्वर आपको ऐसा ही बनाए रक्खे भइया....

Saturday, February 16, 2013

मीडिया का पक्षपात...


मीडीया को कोई कुंभ मे नहाता हुआ दिखता है तो कभी स्टेशन परिसर के अंदर हुए भगदड़ मे अखिलेश सरकार ज़िम्मेदार दिखती है, कभी आज़म ख़ान साहब का ताज महल पर भाषण दिखता है..

लेकिन ये नही दिखता की गंगा जमुनी तहज़ीब का नज़ारा पेश किया उन्न्होने, मेला क्षेत्र की ज़िम्मेदारी उठाई और कम से कम मेला परिसर और शहर मे अधिकतम सुविधाए दिलवाई..

१०८ की अंबूलेंस सेवा नही दिखती जिसने आज ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर बदल दी है..

१०९० नही दिखता जिसकी वजह से राह चलते मनचलो मे एक डर सा पैदा हो गया है.

सालो बाद इस खेती के सीज़न मे आया हुआ नहरो का पानी नही दिखता ??

बिना लाठी खाए मिलने वाली खाद और बीज नही दिखते ??

गाँव का वो समरसता भरा वातावरण नही दिखता ???

मैं कन्या विद्या धन, बेरोज़गारी भत्ता, और टॅबलेट, लॅपटॉप जैसी योजनाओं का नाम नही लूँगा क्यूकी ये पर्याप्त चर्चा पा चुकी लेकिन बाकी उपर की योजनाओं ने किसानो और ग्रामीनो का दिल जीता है, उनका जीवन आसान किया है...

क्या मीडिया को ये सब नही दिखता....

Tuesday, January 8, 2013

रेप "एक हादसा"

 अभी हाल ही में पुष्य मित्र भाई का का एक आलेख  पढ़ा, जिसमे उन्होने लिखा है कि "बलात्कार अपराध के तौर पर निःसंदेह बहुत ही गंभीर है और बलात्कारी को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए, लेकिन मेरे हिसाब से बलात्कार कतई एक क्षुद्र किस्म की क्षति से अधिक नहीं है. इतनी भी नहीं कि इसे आपकी कानी उंगली के कटने के बराबर माना जाये." (पुष्यमित्र जी ) वैसे जो हमारी मानसिकता बन चुकी है उसमे  हमारी दुनिया में बलात्कार ही एकमात्र ऐसा अपराध है जिसमें दोषी की इज्जत का तो पता नहीं, पीड़ित की इज्जत निश्चित तौर पर चली जाती है, और कुछ यही हमें आज तक बालीवुड में भी दिखाया जाता  है की बलात्कारी तो अट्टहास करता है और पीडिता किसी ऊँची पहाड़ी से कूदकर आत्महत्या , इस ट्रेंड को  बदलना होगा, बलात्कार को एक  दुर्घटना से अधिक कुछ भी मानने की मानसिकता से बाहर आना होगा , तभी पीड़िता के बजाय अपराधी को सज़ा मिलेगी और पीडिताएं समाज में सम्मान से जी सकेंगी....

Thursday, January 3, 2013

108, समाजवादी एम्बुलेंस सेवा.........

108, एक नंबर जो आने वाले दिनों में  प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में एक मील का पत्थर साबित होगा, तस्वीर बदल देगा देगा स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की, मुख्यमंत्री माननीय अखिलेश अखिलेश यादव जी को सलाम करता हु,


कल 02 जनवरी की भोर में 4:30 पर मेरा खुद का ऐसा अनुभव हुआ की मै सुखद आश्चर्य से भर उठा, मेरे घर के पास स्थित हरिजान बस्ती से कुछ लोग हमारी सगड़ी (तीन पहिये की साईकिल)  मांगने आये एक प्रसव पीडिता को अस्पताल ले जाने के लिए और इत्तेफाक से सगड़ी का टायर फट चूका था और पापा गाड़ी लेकर बनारस गए हुए थे और पीडिता साईकिल पर जाने की हालत में नहीं थी, पैदल जाना भी उसके लिए मुश्किल था तो उसका पति और देवर ये  कह कर की  की कोई बात नहीं हम चारपाई पर लेकर चले जायेंगे अपने घर चले गए और मैं अपने बिस्तर पर.......

लेकिन मेरी आँखों की नींद उड़ चुकी थी और मैं परेशांन  था की ये कैसे पहुचेंगे अस्पताल,  इस ठण्ड में एक बीमार का चारपाई पर जाना, यकायक मेरे दिमाग में धनतेरस के दिन बाबुल भाई और असित भाई के साथ देखी  हुई समाजवादी एम्बुलेंस सेवा की याद आ गयी और मैंने लेटे-लेटे 108 डायल किया , कुछ ही क्षणों बाद फोन उठा और मुझसे समस्या और पता  पूछी  गयी और बताया गया की यद्यपि भदोही नजदीक था लेकिन एक जिले में एक ही जिले की अम्बुलेंस जाएगी और मुझे ड्राईवर से कांटेक्ट कराया गया, मैंने उसे पता बताया और लोकल न होने की वजह से थोड़ी दिक्कत  आयी लेकिन आश्चर्य पीडिता के चारपाई पर निकल कर घर से 100 मीटर जाते जाते अमबुलंस उनके सामने थी और पीड़ित महिला के पति और सास  रोने लग गए और मुझे दुआये देने लग गए और मैंने कहा की उन दुआओं का असली हक़दार वहां लखनऊ में बैठा हुआ है ............ आज वो महिला एक स्वस्थ बिटिया की मा है और उन्हे ख़ुशी इस बात की भी थी की उनसे एक भी पैसा नहीं लिया गया,,,,

आपको दिल की गहराइयो से दुआ और धन्यवाद भैया आपके ये छोटे छोटे कदम प्रदेश की तकदीर बदल देंगे ................

Saturday, December 15, 2012

कांग्रेसी भाजपा की बदजुबानी पाठशाला......


  • कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता और राज्यसभा सांसद मणिशंकर अय्यर जिनकी गणना देश के श्रेष्‍ठ सांसदों में होती है,के द्वारा सांसदों की तुलना जानवर से किया जाना भाषा की मर्यादा को तार-तार करने वाला है।

  • अभी चंद रोज पहले गुजरात विधानसभा चुनाव प्रचार में यह कहते सुने गए कि गुजरात के लोग दीपावली पर रावण को हराए। उन्होंने यह भी कहा कि मोदी लौहपुरुष नहीं लहूपुरुष हैं।

  • कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह जो अपनी बदजुबानी के लिए कुख्यात हो चुके हैं।

  •  एक माह पहले ही उन्होंने इंडिया अगेंस्ट करप्‍शन के नेता अरविंद केजरीवाल की तुलना बॉलीवुड की आइटम गर्ल राखी सावंत से की। कहा था कि केजरीवाल राखी सावंत की तरह हैं। दोनों एक्सपोज करना चाहते हैं, जबकि दोनों के पास साबित करने के लिए कुछ भी नहीं है।

  • गुजरात कांग्रेस के अध्यक्ष अर्जून मोडवाडिया ने मोदी की तुलना बंदर से करते हुए मोदीराज को अंधेरगर्दी और चैपटराज कहा है

  • इसी तरह की जुबानी बर्बरता कांग्रेस की नेत्री रेणुका चौधरी द्वारा भी दिखाया गया। दो कदम आगे बढ़ कांग्रेसी सांसद हुसैन दलवी ने तो यहां तक कह डाला कि मोदी की तुलना सरदार पटेल से नहीं की जा सकती क्योंकि उनके आगे वे चूहा हैं।

  • स्वयं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी भी 2007 के गुजरात विधानसभा चुनाव में मोदी को मौत का सौदागर कह चुकी हैं। उनके बनाए ट्रेंड पर ही उनके पार्टी के नेता आगे बढ़ रहे हैं !

  • अन्ना आंदोलन के दौरान कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी समाजसेवी अन्ना को भ्रष्‍टाचारी कहते सुने गए। 

  • दिग्विजय सिंह आज भी उन्हें आरएसएस का एजेंट कहने से अघाते नहीं हैं। 

  • केंद्रीय इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान यह कहते सुने गए थे कि अगर टीम अन्ना यूपी में आती है तो उसे देख लेंगे। 

  • गत दिनों पहले आज के विदेश मंत्री और तब के कानूनमंत्री सलमान खुर्षीद टीम केजरीवाल को धमकाते सुने गए थे कि अगर वे फर्रुखाबाद आए तो लौटकर नहीं जा पाएंगे। उन्होंने यह भी जोड़ा था कि बहुत दिनों से मैं कलम से काम कर रहा था लेकिन अब वक्त आ गया है कि कलम के साथ-साथ लहू से भी काम करुं।

  • गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी जो अपनी राजनीतिक गंभीरता के लिए जाने जाते हैं पिछले दिनों वे हिमाचल प्रदेश में एक चुनावी रैली के दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री शशि थरुर का नाम लिए बिना उनकी पत्नी को 50 करोड़ रुपए की गर्लफ्रेंड बता डाला। 

  • छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने  सेमिनार के दौरान कहा था कि अच्छी बाइक, अच्छा सड़क, अच्छा मोबाइल और अच्छी गर्लफ्रेंड दुर्घटना का प्रमुख कारण है।

  • भाजपा के राज्यसभा सांसद और देश के जाने-माने वकील रामजेठमलानी राम को बुरा पति कह आस्थावान लोगों के मर्म पर चोट कर आलोचना के पात्र बन चुके हैं।

  • नितिन गडकरी स्वामी विवकानंद और मोस्ट वांटेड आतंकी दाउद इब्राहीम का आइक्यू एक जैसा बता अपनी खूब किरकिरी कराई थी।

  • भाजपा के नेता यशवंत सिंहा द्वारा राहुल गांधी को घोड़ा कहा गया। 



Saturday, September 15, 2012

यूपीए का डीजल बम , कांग्रेस का निकलेगा दम


कांगी गैंग के ताबूत की आखिरी कील, सांसद निधि 2 से बढ़ा के 5 करोड़ कर दी जाती है, एक पागल और भ्रमित बाबा, एक निर्दयी महारानी एक नाकारा प्रधानमंत्री, एक कुक प्रेसिडेंट और भ्रष्ट कैबिनेट पर अरबो खर्च करने वाली सरकार अब देशवासियों के धैर्य की परीक्षा लेने पर उतारू हो गयी है आश्चर्य नहीं अगर कल जनता सड़क पर उतर कर विद्रोह कर बैठे .

सरकार जब बड़ी कंपनियों को टैक्स में 13 लाख करोड़ रुपये तक की छूट दे सकती है तो क्या जनता को सस्ते दामों पर सिलेंडर उपलब्ध कराने के लिए 37 हजार करोड़ रुपये खर्च नहीं कर सकती। जब नेताओं को दिए जाने वाले सिलेंडरों की संख्या सीमित नहीं है तो जनता को क्यों गिनकर सिलेंडर दिए जाते हैं। नवीन जिंदल के घर एक साल में 370 सिलेंडर पहुंचाए जा सकते हैं तो आम आदमी साल भर में मात्र छह सिलेंडरों में कैसे गुजारा कर सकता है।


मेरा अनुरोध है हर उस पार्टी से जो देश की जनता का खून चूसने वाली इस सरकार के साथ है कि इनके पिछवाड़े पर लात मार कर इन्हे अकेला छोड़ दे, और जनता से अपील है कि अब किस चीज का इंतज़ार है कब तक अपना खून पिला कर इन जोंको को पालेंगे,अब इनसे अपने ख़ून पसीने का हिसाब लो आप लोग..

डीजल का दाम बढ़ना सिर्फ डीजल का दाम बढ़ना नहीं है ये सारी महंगाई की माँ है, महंगोत्री है, इससे खेती कि लगत बढ़ेगी, माल धुलाई बढ़ेगी, कार टैक्सी का किराया बढेगा, पहले से महंगाई कि आंच झेल रही जनता अब निचुड़ जाएगी..

एक ही रास्ता है निचुड़ो या निचोड़ डालो इन कांग्रेसियों को, हर कांग्रेसी मंत्री और सांसद विधायको के घर पर धरना दिया जाय, हर चुनाव में इन्हें बेचारा बनाया जाय..और इनके अहंकार को तोड़ डाला जाय..



कांग्रेस भगाओ देश बचाओ
सड़क पर आओ, देश बचाओ :

Thursday, May 24, 2012

पेट्रोल की साढ़े साती....


भैया तेल तो इंडिया में बहुत निकलने वाला है ,

कांगी गैंग और तेल कंपनिया आम आदमी का तेल जो निकलने वाला है और ये आम आदमी 2014 में कांगी गैंग का तेल निकलने वाला है और कांगी गैंग और बीजेपी जैसी पार्टिया मिलकर देश का तेल निकालने वाली है.......

सो तेल के लिए 'No Worries'

 पेट्रोल बम मारा है यूपी ने भारतीय जनता के ऊपर जो की खुद कांगी गँग और उसके गुर्गो के लिए परमाणु बोम से भी ज्यादा खतरनाक होगा .

समझ में नहीं आता कहा गया कांग्रेस का हाथ गरीब के साथ, ?

कहा गया वो बेवकूफ बाबा जो दिल्ली में गरीबो और आदिवासियों का चौकीदार होने की बात किय करता था ??

कहा गयी वो हृदयहीन राजमाता जिसके नकली त्याग की भडैती आज तक कांग्रेसी भाट गाते है..???

अब वक़्त आ गया है की जनता सिर्फ सवाल न पूछे इन खुनी चमगादड़ो की गर्दन पकड़ कर इनसे जवाब मांगे और जवाब न मिलने पर गर्दन मरोड़ भी सके..

Sunday, April 29, 2012

समाजवादी लोकतांत्रीकरण की राह पर अखिलेश

अखिलेश युवा हैं, उनकी पढ़ाई-लिखाई में प्रोफेशनलिज्म का बहुत महत्व रहा है। जिसे जो काम करना है, ठीक से करे, ईमानदारी से करे, निष्ठा से करे, काम को अपना काम समझ कर करे। यही प्रोफेशनल तरीका है। वह कार्यशैली में हाईटेक हो, पर व्यवहार में पारंपरिक हिंदुस्तानी। सबकेप्रति आदर का भाव। अफसरी नहीं। कोई भी किसी दफ्तर में अपना काम लेकर जाय, तो उसका अपनेपन केसाथ स्वागत हो, उसे दुत्कारा न जाय, अफसरी न झाड़ी जाय। आफ्टर आल सभी जनता की सेवा केलिए हैं, कर्मचारी, अफसर और सरकार भी। जनता सबसे ऊपर है, आम आदमी सबसे ज्यादा ध्यान दिये जाने योग्य व्यक्ति है। अखिलेश कुछ ऐसी ही कार्य संस्कृति चाहते हैं। लगे कि सरकार कोई तोप चीज नहीं है, वह जनता केद्वारा, जनता की और जनता केलिए है।

वे जानते हैं कि पूरे तंत्न में पांच साल से एक अजीब तरह की जड़ता और असंवेदनशीलता घर कर गयी है। इसको बदलने के लिए, इसे ज्यादा से ज्यादा जनसंवेदनशील बनाने केलिए स्वयं भी वैसा ही व्यवहार करना पड़ेगा। महात्मा गांधी और डा. राम मनोहर लोहिया का मानना था कि नेता को विशिष्ट नहीं होना चाहिए, उसे जनता से अलग नहीं दिखना चाहिए। आम आदमी जिस तरह का जीवन व्यतीत कर रहा है, वही जीवन नेता को भी अपने लिए चुनना चाहिए, तभी वह व्यापक स्तर पर लोगों के साथ तादात्म्य स्थापित कर सकेगा, तभी वह लोगों की समस्याओं को समझ सकेगा और केवल तभी वह उनकेसमाधान की दिशा में कदम बढ़ा सकेगा। इतिहास गवाह है कि जो नेता जनता से दूर गये, उनको लोगों ने सत्ता से उतार दिया, समय की कब्र में दफ्न कर दिया।

अखिलेश को पता है कि यह फासला नहीं होना चाहिए। इसीलिए वे नयी सरकार की कार्यसंस्कृति में आम जनता को केंद्र में रखकर चल रहे हैं। आप को याद होगा, पहले जब मुख्यमंत्नी का काफिला सड़क पर निकलता था तो राजशाही अंदाज में। सारी सड़कें बंद हो जाती थीं, जनता जाय भाड़ में। कितना भी जरूरी काम है, रुको और इंतजार करो या फिर ज्यादा उछल-कूद की तो डंडे खाओ। लोग सोचते थे, ये कैसे जनता केनेता हैं, जिनको जनता की तकलीफों का ही ध्यान नहीं है। कई बार लोग गालियाँ भी देते थे। लेकिन अब अखिलेश केसाथ ऐसा नहीं है। कोई ताम-झाम नहीं, कोई काफिला नहीं, किसी को कोई परेशानी नहीं। मुख्यमंत्नी निकल जाते हैं, आम लोगों को पता ही नहीं चलता है, उनका रास्ता नहीं रुकता है, उन्हें कोई कठिनाई नहीं होती है।

इतना ही नहीं किसी को भी मुख्यमंत्नी से मिलना है तो रास्ते खुले हुए हैं। ज्यादा छानबीन नहीं, रोक-टोक नहीं। कोई अदना से अदना आदमी भी पहुंच सकता है, अपनी बात कह सकता है, अपना दुख बयान कर सकता है। यह मुख्यमंत्नी का नहीं जनता का दरबार है और अपने ही दरबार में आखिर जनता को क्यों कोई दिक्कत होगी। मुख्यमंत्नी की शैली है, लोगों केपास होने की। बहुत सहज हैकि वे अफसरों से भी ऐसी ही उम्मीद करेंगे। जनता ने तो अपना काम कर दिया है, अब सरकार की बारी है। जिस उम्मीद से, जिस सपने से लोगों ने समाजवादी पार्टी को सत्ता तक पहुंचाया है, वे उम्मीदें, वे सपने टूटने नहीं चाहिए। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को मुख्यमंत्नी का यह साफ संदेश है। कोई लिखा हुआ नहीं, उनकेव्यवहार से, उनकी अपनी कार्यशैली से। समय से कार्यालय आइये, जनता की पीड़ा कम करने केलिए जितना कर सकें, करिये।

सत्ता का गुरूर


कर्नाटक के तुमकुर में शनिवार, 28 अप्रैल को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को काले झंडे दिखाने वाली महिला की पुलिस ने जमकर पिटाई की। सोनिया यहां सिद्धगंगा मठ के प्रमुख शिवकुमार स्वामी के 105वें जन्मदिन पर आयोजित गुरु वंदना महोत्सव में हिस्सा लेने पहुंची थीं। क्या कांग्रेस की राजमाता और उनके युवराज को झंडा दिखाना इतना बड़ा गुनाह है की एक महिला के मान सम्मान को ताक पर रखकर उसे पीटा जाता है , उसका मुह दबाया जाता है, आखिर किस तरह की महिला है आप सोनिया जी, और कर्नाटक की बीजेपी सरकार और उसके पुलिस वालो को भी सलाम है ये साबित करने के लिए की कांग्रेस और बीजेपी एक सिक्के के दो पहलू है और दोनों के लिए एक दुसरे को विरोध से बचाना एक महिला के मान और सम्मान से कही ज्यादा है और कांग्रेस ने तो खैर गुंडागर्दी की दौड़ में सबको पीछे छोड़ दिया है कही सांसद , विधायक इलाहबाद संसद सड़क छाप गुंडों की तरह छात्रो को बेशर्मी से से पिटते है,तो कही दिग्गी विपक्षी कार्यकर्ताओं और मीडिया को पिटता है. अब देश को एक विकल्प चाहिए, बदलाव चाहिए, हर किसी के मन से ये भावना निकालनी होगी की सत्ता उसकी गुलाम है...

Tuesday, May 10, 2011

खामोश,कब्ज़ा जारी है..

आज उत्तर प्रदेश के किसान आन्दोलन के बारे में पढ़कर मालामूर्ति माफ़ कीजियेगा मायावती जी को धन्यवाद देने का दिल कर आया की भले ही हम अंग्रेज शाशन काल में नहीं पैदा हुए लेकिन मायावती सरकार ने ये तो दिखा ही दिया की अंग्रेज शासन इससे बर्बर नहीं रहा होगा, और की किस तरह अंग्रेज नील की खेती के लिए किसानो की जमीं कब्जाते थे और उनके इशारे पर हमारी भारतीय पुलिस विरोध करते किसानो के सीने छलनी कर दिया करती थी.

अहसास होता है की किस तरह और किन परिस्थितियों में भगत सिंह जी, चंद्रशेखर आजाद और हजारो क्रन्तिकारी बंदूके लेकर अपनी आराम की जिंदगी छोड़कर निकल पड़े होंगे अंग्रेजो और अपने ही भारतीय पुलिस वालो को सबक सिखाने.

मैंने आज से तीन साल पहले ही बलिया में पुलिसिया गुंडई देखकर लिखा था की यही हाल रहा तो वो दिन दूर नहीं जब पोलिस को भी आम जनता के गुस्से का शिकार होना पड़ेगा, जिस तरह से सहारनपुर से लेकर सोनभद्र तक और बुलंदशहर से लेकर बलिया तक, गाजियाबाद से लेकर गाजीपुर तक और आगरा से लेकर अलाहाबाद तक कही ताज कोरिडोर तो कही गंगा एक्सप्रेस वे तो कही यमुना एक्सप्रेस वे के नाम पर चन्द सिक्को और बंदूको के दम पर किसानो की जमीं कब्जाई जा रही है और जिस तरह जेपी ग्रुप के फायदे के लिए दलितों तक के गाँव के गाँव उजाड़ दिए जा रहे है उससे लोगो में गुस्सा और भड़का है.

आखितर चार महीने से किसान आन्दोलन कर रहे थे तो क्यों नहीं सरकार ने उनकी सुध ली और कब्ज़ा जारी रक्खा ? क्यों ये सरकार हर आन्दोलन को लाठी और गोली से दबाने पर लगी हुई है?

२००७ से आज तक ८ बार यूपी के किसानो पर गोलिया चल चुकी है जिसमे दर्जन भर से ज्यादा किसान मरे गए है.अभी भत्ता गाँव के दर्जनों किसान लापता है और आप जानेगे की इन्हे पुलिस वालों के जानलेवा गुस्से का शिकार होना पड़ा है और शायद ये अब कभी वापस नहीं आयेंगे (और ऐसे कामो में हमारी पुलिस वैसे भी निपुण है) किसानो की बात करने वाले उनके हक़ के लिए आवाज उठाने वालो पर इनाम रखे जा रहे है क्यों नहीं भड़केगा किसानो का गुस्सा ??

कभी पढता था की विदेशी आक्रमण कारी आते थे तो फसलो को जलाते हुए, घरो को आग लगते हुए और गाँव को घेर कर कत्लेआम करते हुए आते थे , आज कमोबेश यही हालत उत्तर प्रदेश में हो गयी है, अब पोलिस को निरंकुश हो गयी है क्युकी उन्हे अपने आकाओं को खुश रखना है..

सरकार को सोचना होगा की आखिर क्यों शांत रहने वाला किसान आज इतना उग्र हो गया है, धरती किसान की माँ होती है, उसके पेट भरने का जरिया होती है और ये कुछ हजार रुपये का मुआवजा जमीन की जगह नहीं ले सकता.

पुलिस के जवानों की मौत का दुःख सबको है लेकिन जब तक पुलिस और पीएसी के जवान इस मानसिकता से नहीं निकालेंगे की वर्दी ने उनको किसी को भी कुचलने का हक दे सिया है , जनता का गुस्सा ऐसे ही फूटता रहेगा, अगर सरकार सोचती है की इस तरह पुलिस, कत्लेआम, दबंगई और और दबाव से इस मामले को शांत कर लिया जायेगा तो ये उसकी भूल है, ये दबाव उस प्रेसर कूकर की तरह विस्फोट करेगा जिसकी भाप नहीं निकल पाती.


सरकार इसे उपद्रव का नाम देकर बच नहीं सकती क्युकी ये किसान आन्दोलन है और ऐसे आन्दोलन इतिहास तक बदल देते है, सरकारे तो बहुत छोटी चीज है.