Saturday, December 15, 2012

कांग्रेसी भाजपा की बदजुबानी पाठशाला......


  • कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता और राज्यसभा सांसद मणिशंकर अय्यर जिनकी गणना देश के श्रेष्‍ठ सांसदों में होती है,के द्वारा सांसदों की तुलना जानवर से किया जाना भाषा की मर्यादा को तार-तार करने वाला है।

  • अभी चंद रोज पहले गुजरात विधानसभा चुनाव प्रचार में यह कहते सुने गए कि गुजरात के लोग दीपावली पर रावण को हराए। उन्होंने यह भी कहा कि मोदी लौहपुरुष नहीं लहूपुरुष हैं।

  • कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह जो अपनी बदजुबानी के लिए कुख्यात हो चुके हैं।

  •  एक माह पहले ही उन्होंने इंडिया अगेंस्ट करप्‍शन के नेता अरविंद केजरीवाल की तुलना बॉलीवुड की आइटम गर्ल राखी सावंत से की। कहा था कि केजरीवाल राखी सावंत की तरह हैं। दोनों एक्सपोज करना चाहते हैं, जबकि दोनों के पास साबित करने के लिए कुछ भी नहीं है।

  • गुजरात कांग्रेस के अध्यक्ष अर्जून मोडवाडिया ने मोदी की तुलना बंदर से करते हुए मोदीराज को अंधेरगर्दी और चैपटराज कहा है

  • इसी तरह की जुबानी बर्बरता कांग्रेस की नेत्री रेणुका चौधरी द्वारा भी दिखाया गया। दो कदम आगे बढ़ कांग्रेसी सांसद हुसैन दलवी ने तो यहां तक कह डाला कि मोदी की तुलना सरदार पटेल से नहीं की जा सकती क्योंकि उनके आगे वे चूहा हैं।

  • स्वयं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी भी 2007 के गुजरात विधानसभा चुनाव में मोदी को मौत का सौदागर कह चुकी हैं। उनके बनाए ट्रेंड पर ही उनके पार्टी के नेता आगे बढ़ रहे हैं !

  • अन्ना आंदोलन के दौरान कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी समाजसेवी अन्ना को भ्रष्‍टाचारी कहते सुने गए। 

  • दिग्विजय सिंह आज भी उन्हें आरएसएस का एजेंट कहने से अघाते नहीं हैं। 

  • केंद्रीय इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान यह कहते सुने गए थे कि अगर टीम अन्ना यूपी में आती है तो उसे देख लेंगे। 

  • गत दिनों पहले आज के विदेश मंत्री और तब के कानूनमंत्री सलमान खुर्षीद टीम केजरीवाल को धमकाते सुने गए थे कि अगर वे फर्रुखाबाद आए तो लौटकर नहीं जा पाएंगे। उन्होंने यह भी जोड़ा था कि बहुत दिनों से मैं कलम से काम कर रहा था लेकिन अब वक्त आ गया है कि कलम के साथ-साथ लहू से भी काम करुं।

  • गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी जो अपनी राजनीतिक गंभीरता के लिए जाने जाते हैं पिछले दिनों वे हिमाचल प्रदेश में एक चुनावी रैली के दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री शशि थरुर का नाम लिए बिना उनकी पत्नी को 50 करोड़ रुपए की गर्लफ्रेंड बता डाला। 

  • छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने  सेमिनार के दौरान कहा था कि अच्छी बाइक, अच्छा सड़क, अच्छा मोबाइल और अच्छी गर्लफ्रेंड दुर्घटना का प्रमुख कारण है।

  • भाजपा के राज्यसभा सांसद और देश के जाने-माने वकील रामजेठमलानी राम को बुरा पति कह आस्थावान लोगों के मर्म पर चोट कर आलोचना के पात्र बन चुके हैं।

  • नितिन गडकरी स्वामी विवकानंद और मोस्ट वांटेड आतंकी दाउद इब्राहीम का आइक्यू एक जैसा बता अपनी खूब किरकिरी कराई थी।

  • भाजपा के नेता यशवंत सिंहा द्वारा राहुल गांधी को घोड़ा कहा गया। 



Saturday, September 15, 2012

यूपीए का डीजल बम , कांग्रेस का निकलेगा दम


कांगी गैंग के ताबूत की आखिरी कील, सांसद निधि 2 से बढ़ा के 5 करोड़ कर दी जाती है, एक पागल और भ्रमित बाबा, एक निर्दयी महारानी एक नाकारा प्रधानमंत्री, एक कुक प्रेसिडेंट और भ्रष्ट कैबिनेट पर अरबो खर्च करने वाली सरकार अब देशवासियों के धैर्य की परीक्षा लेने पर उतारू हो गयी है आश्चर्य नहीं अगर कल जनता सड़क पर उतर कर विद्रोह कर बैठे .

सरकार जब बड़ी कंपनियों को टैक्स में 13 लाख करोड़ रुपये तक की छूट दे सकती है तो क्या जनता को सस्ते दामों पर सिलेंडर उपलब्ध कराने के लिए 37 हजार करोड़ रुपये खर्च नहीं कर सकती। जब नेताओं को दिए जाने वाले सिलेंडरों की संख्या सीमित नहीं है तो जनता को क्यों गिनकर सिलेंडर दिए जाते हैं। नवीन जिंदल के घर एक साल में 370 सिलेंडर पहुंचाए जा सकते हैं तो आम आदमी साल भर में मात्र छह सिलेंडरों में कैसे गुजारा कर सकता है।


मेरा अनुरोध है हर उस पार्टी से जो देश की जनता का खून चूसने वाली इस सरकार के साथ है कि इनके पिछवाड़े पर लात मार कर इन्हे अकेला छोड़ दे, और जनता से अपील है कि अब किस चीज का इंतज़ार है कब तक अपना खून पिला कर इन जोंको को पालेंगे,अब इनसे अपने ख़ून पसीने का हिसाब लो आप लोग..

डीजल का दाम बढ़ना सिर्फ डीजल का दाम बढ़ना नहीं है ये सारी महंगाई की माँ है, महंगोत्री है, इससे खेती कि लगत बढ़ेगी, माल धुलाई बढ़ेगी, कार टैक्सी का किराया बढेगा, पहले से महंगाई कि आंच झेल रही जनता अब निचुड़ जाएगी..

एक ही रास्ता है निचुड़ो या निचोड़ डालो इन कांग्रेसियों को, हर कांग्रेसी मंत्री और सांसद विधायको के घर पर धरना दिया जाय, हर चुनाव में इन्हें बेचारा बनाया जाय..और इनके अहंकार को तोड़ डाला जाय..



कांग्रेस भगाओ देश बचाओ
सड़क पर आओ, देश बचाओ :

Thursday, May 24, 2012

पेट्रोल की साढ़े साती....


भैया तेल तो इंडिया में बहुत निकलने वाला है ,

कांगी गैंग और तेल कंपनिया आम आदमी का तेल जो निकलने वाला है और ये आम आदमी 2014 में कांगी गैंग का तेल निकलने वाला है और कांगी गैंग और बीजेपी जैसी पार्टिया मिलकर देश का तेल निकालने वाली है.......

सो तेल के लिए 'No Worries'

 पेट्रोल बम मारा है यूपी ने भारतीय जनता के ऊपर जो की खुद कांगी गँग और उसके गुर्गो के लिए परमाणु बोम से भी ज्यादा खतरनाक होगा .

समझ में नहीं आता कहा गया कांग्रेस का हाथ गरीब के साथ, ?

कहा गया वो बेवकूफ बाबा जो दिल्ली में गरीबो और आदिवासियों का चौकीदार होने की बात किय करता था ??

कहा गयी वो हृदयहीन राजमाता जिसके नकली त्याग की भडैती आज तक कांग्रेसी भाट गाते है..???

अब वक़्त आ गया है की जनता सिर्फ सवाल न पूछे इन खुनी चमगादड़ो की गर्दन पकड़ कर इनसे जवाब मांगे और जवाब न मिलने पर गर्दन मरोड़ भी सके..

Sunday, April 29, 2012

समाजवादी लोकतांत्रीकरण की राह पर अखिलेश

अखिलेश युवा हैं, उनकी पढ़ाई-लिखाई में प्रोफेशनलिज्म का बहुत महत्व रहा है। जिसे जो काम करना है, ठीक से करे, ईमानदारी से करे, निष्ठा से करे, काम को अपना काम समझ कर करे। यही प्रोफेशनल तरीका है। वह कार्यशैली में हाईटेक हो, पर व्यवहार में पारंपरिक हिंदुस्तानी। सबकेप्रति आदर का भाव। अफसरी नहीं। कोई भी किसी दफ्तर में अपना काम लेकर जाय, तो उसका अपनेपन केसाथ स्वागत हो, उसे दुत्कारा न जाय, अफसरी न झाड़ी जाय। आफ्टर आल सभी जनता की सेवा केलिए हैं, कर्मचारी, अफसर और सरकार भी। जनता सबसे ऊपर है, आम आदमी सबसे ज्यादा ध्यान दिये जाने योग्य व्यक्ति है। अखिलेश कुछ ऐसी ही कार्य संस्कृति चाहते हैं। लगे कि सरकार कोई तोप चीज नहीं है, वह जनता केद्वारा, जनता की और जनता केलिए है।

वे जानते हैं कि पूरे तंत्न में पांच साल से एक अजीब तरह की जड़ता और असंवेदनशीलता घर कर गयी है। इसको बदलने के लिए, इसे ज्यादा से ज्यादा जनसंवेदनशील बनाने केलिए स्वयं भी वैसा ही व्यवहार करना पड़ेगा। महात्मा गांधी और डा. राम मनोहर लोहिया का मानना था कि नेता को विशिष्ट नहीं होना चाहिए, उसे जनता से अलग नहीं दिखना चाहिए। आम आदमी जिस तरह का जीवन व्यतीत कर रहा है, वही जीवन नेता को भी अपने लिए चुनना चाहिए, तभी वह व्यापक स्तर पर लोगों के साथ तादात्म्य स्थापित कर सकेगा, तभी वह लोगों की समस्याओं को समझ सकेगा और केवल तभी वह उनकेसमाधान की दिशा में कदम बढ़ा सकेगा। इतिहास गवाह है कि जो नेता जनता से दूर गये, उनको लोगों ने सत्ता से उतार दिया, समय की कब्र में दफ्न कर दिया।

अखिलेश को पता है कि यह फासला नहीं होना चाहिए। इसीलिए वे नयी सरकार की कार्यसंस्कृति में आम जनता को केंद्र में रखकर चल रहे हैं। आप को याद होगा, पहले जब मुख्यमंत्नी का काफिला सड़क पर निकलता था तो राजशाही अंदाज में। सारी सड़कें बंद हो जाती थीं, जनता जाय भाड़ में। कितना भी जरूरी काम है, रुको और इंतजार करो या फिर ज्यादा उछल-कूद की तो डंडे खाओ। लोग सोचते थे, ये कैसे जनता केनेता हैं, जिनको जनता की तकलीफों का ही ध्यान नहीं है। कई बार लोग गालियाँ भी देते थे। लेकिन अब अखिलेश केसाथ ऐसा नहीं है। कोई ताम-झाम नहीं, कोई काफिला नहीं, किसी को कोई परेशानी नहीं। मुख्यमंत्नी निकल जाते हैं, आम लोगों को पता ही नहीं चलता है, उनका रास्ता नहीं रुकता है, उन्हें कोई कठिनाई नहीं होती है।

इतना ही नहीं किसी को भी मुख्यमंत्नी से मिलना है तो रास्ते खुले हुए हैं। ज्यादा छानबीन नहीं, रोक-टोक नहीं। कोई अदना से अदना आदमी भी पहुंच सकता है, अपनी बात कह सकता है, अपना दुख बयान कर सकता है। यह मुख्यमंत्नी का नहीं जनता का दरबार है और अपने ही दरबार में आखिर जनता को क्यों कोई दिक्कत होगी। मुख्यमंत्नी की शैली है, लोगों केपास होने की। बहुत सहज हैकि वे अफसरों से भी ऐसी ही उम्मीद करेंगे। जनता ने तो अपना काम कर दिया है, अब सरकार की बारी है। जिस उम्मीद से, जिस सपने से लोगों ने समाजवादी पार्टी को सत्ता तक पहुंचाया है, वे उम्मीदें, वे सपने टूटने नहीं चाहिए। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को मुख्यमंत्नी का यह साफ संदेश है। कोई लिखा हुआ नहीं, उनकेव्यवहार से, उनकी अपनी कार्यशैली से। समय से कार्यालय आइये, जनता की पीड़ा कम करने केलिए जितना कर सकें, करिये।

सत्ता का गुरूर


कर्नाटक के तुमकुर में शनिवार, 28 अप्रैल को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को काले झंडे दिखाने वाली महिला की पुलिस ने जमकर पिटाई की। सोनिया यहां सिद्धगंगा मठ के प्रमुख शिवकुमार स्वामी के 105वें जन्मदिन पर आयोजित गुरु वंदना महोत्सव में हिस्सा लेने पहुंची थीं। क्या कांग्रेस की राजमाता और उनके युवराज को झंडा दिखाना इतना बड़ा गुनाह है की एक महिला के मान सम्मान को ताक पर रखकर उसे पीटा जाता है , उसका मुह दबाया जाता है, आखिर किस तरह की महिला है आप सोनिया जी, और कर्नाटक की बीजेपी सरकार और उसके पुलिस वालो को भी सलाम है ये साबित करने के लिए की कांग्रेस और बीजेपी एक सिक्के के दो पहलू है और दोनों के लिए एक दुसरे को विरोध से बचाना एक महिला के मान और सम्मान से कही ज्यादा है और कांग्रेस ने तो खैर गुंडागर्दी की दौड़ में सबको पीछे छोड़ दिया है कही सांसद , विधायक इलाहबाद संसद सड़क छाप गुंडों की तरह छात्रो को बेशर्मी से से पिटते है,तो कही दिग्गी विपक्षी कार्यकर्ताओं और मीडिया को पिटता है. अब देश को एक विकल्प चाहिए, बदलाव चाहिए, हर किसी के मन से ये भावना निकालनी होगी की सत्ता उसकी गुलाम है...

Tuesday, May 10, 2011

खामोश,कब्ज़ा जारी है..

आज उत्तर प्रदेश के किसान आन्दोलन के बारे में पढ़कर मालामूर्ति माफ़ कीजियेगा मायावती जी को धन्यवाद देने का दिल कर आया की भले ही हम अंग्रेज शाशन काल में नहीं पैदा हुए लेकिन मायावती सरकार ने ये तो दिखा ही दिया की अंग्रेज शासन इससे बर्बर नहीं रहा होगा, और की किस तरह अंग्रेज नील की खेती के लिए किसानो की जमीं कब्जाते थे और उनके इशारे पर हमारी भारतीय पुलिस विरोध करते किसानो के सीने छलनी कर दिया करती थी.

अहसास होता है की किस तरह और किन परिस्थितियों में भगत सिंह जी, चंद्रशेखर आजाद और हजारो क्रन्तिकारी बंदूके लेकर अपनी आराम की जिंदगी छोड़कर निकल पड़े होंगे अंग्रेजो और अपने ही भारतीय पुलिस वालो को सबक सिखाने.

मैंने आज से तीन साल पहले ही बलिया में पुलिसिया गुंडई देखकर लिखा था की यही हाल रहा तो वो दिन दूर नहीं जब पोलिस को भी आम जनता के गुस्से का शिकार होना पड़ेगा, जिस तरह से सहारनपुर से लेकर सोनभद्र तक और बुलंदशहर से लेकर बलिया तक, गाजियाबाद से लेकर गाजीपुर तक और आगरा से लेकर अलाहाबाद तक कही ताज कोरिडोर तो कही गंगा एक्सप्रेस वे तो कही यमुना एक्सप्रेस वे के नाम पर चन्द सिक्को और बंदूको के दम पर किसानो की जमीं कब्जाई जा रही है और जिस तरह जेपी ग्रुप के फायदे के लिए दलितों तक के गाँव के गाँव उजाड़ दिए जा रहे है उससे लोगो में गुस्सा और भड़का है.

आखितर चार महीने से किसान आन्दोलन कर रहे थे तो क्यों नहीं सरकार ने उनकी सुध ली और कब्ज़ा जारी रक्खा ? क्यों ये सरकार हर आन्दोलन को लाठी और गोली से दबाने पर लगी हुई है?

२००७ से आज तक ८ बार यूपी के किसानो पर गोलिया चल चुकी है जिसमे दर्जन भर से ज्यादा किसान मरे गए है.अभी भत्ता गाँव के दर्जनों किसान लापता है और आप जानेगे की इन्हे पुलिस वालों के जानलेवा गुस्से का शिकार होना पड़ा है और शायद ये अब कभी वापस नहीं आयेंगे (और ऐसे कामो में हमारी पुलिस वैसे भी निपुण है) किसानो की बात करने वाले उनके हक़ के लिए आवाज उठाने वालो पर इनाम रखे जा रहे है क्यों नहीं भड़केगा किसानो का गुस्सा ??

कभी पढता था की विदेशी आक्रमण कारी आते थे तो फसलो को जलाते हुए, घरो को आग लगते हुए और गाँव को घेर कर कत्लेआम करते हुए आते थे , आज कमोबेश यही हालत उत्तर प्रदेश में हो गयी है, अब पोलिस को निरंकुश हो गयी है क्युकी उन्हे अपने आकाओं को खुश रखना है..

सरकार को सोचना होगा की आखिर क्यों शांत रहने वाला किसान आज इतना उग्र हो गया है, धरती किसान की माँ होती है, उसके पेट भरने का जरिया होती है और ये कुछ हजार रुपये का मुआवजा जमीन की जगह नहीं ले सकता.

पुलिस के जवानों की मौत का दुःख सबको है लेकिन जब तक पुलिस और पीएसी के जवान इस मानसिकता से नहीं निकालेंगे की वर्दी ने उनको किसी को भी कुचलने का हक दे सिया है , जनता का गुस्सा ऐसे ही फूटता रहेगा, अगर सरकार सोचती है की इस तरह पुलिस, कत्लेआम, दबंगई और और दबाव से इस मामले को शांत कर लिया जायेगा तो ये उसकी भूल है, ये दबाव उस प्रेसर कूकर की तरह विस्फोट करेगा जिसकी भाप नहीं निकल पाती.


सरकार इसे उपद्रव का नाम देकर बच नहीं सकती क्युकी ये किसान आन्दोलन है और ऐसे आन्दोलन इतिहास तक बदल देते है, सरकारे तो बहुत छोटी चीज है.

Friday, April 8, 2011

आव्हान अन्ना के साथ, भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग का एक सिपाही बनने का ..

मेरे दोस्तों और साथियों;

मै अपने हर उस साथी का आव्हान करता हु जो आज देश के बाहर है, चाहे वो दुनिया के किसी भी हिस्से में रह रहे हो..हम कही भी रहे लेकिन देश के लिए अपने फर्ज अपनी जिम्मेदारियों से अलग नहीं हो सकते, देश के कर्ज से मुह नहीं छ्हुपा सकते, इसलिए चाहे अनचाहे हमें भी हर उस घटना का, हर उस किस्से का और हर उस नामी और बदनामी का हिस्सा बना पड़ता है जो भारत के , हमारे देश के हमारी मातृभूमि के साथ जुडी होती है.

आज देश में हालात बहुत खराब चल रहे हैं, सत्ता में बैठी हुई सरकारे देशों और प्रदेशो को बेदर्दी से लूट रही है, नोच खसोट रही है, जनता को सरकारे चुनने की सजा दी जा रही है, कभी संसद खरीदे जा रहे है तो कही ईमान बेचा जा रहहै, आत्मा और जमीर बेचीं जा रही है, देश में लगातार घोटालो की बढ़ आ रही है कभी 70000 करोड़ का कामनवेल्थ घोटाला आता है तो उसके बाद 172000 करोड़ का 2G स्पेक्ट्रुम,सैनिको के घरो पर भ्रष्ट नेता मुख्यमंत्री हथियाते है और उसे आदर्श नाम दिया जाता है तो कभी गेहू एक्सपोर्ट तो कभी चीनी और कभी चावल घोटाला, एक भ्रष्ट अधिकारी को सबसे बड़ा भ्रष्टाचार विरोधी अधिकारी बनाया जाता है तो शरद पवार जैसा भ्रष्ट नेता भ्रष्टाचार निरोधी कमिटी का सदस्य बनाया जाता है. तो कभी एक ख़त्म नहीं होता तब तक दूसरा फिर तीसरा लेकिन हम इसे अंतहीन सिलसिले में नहीं बदलने देंगे क्युकी न तो अब प्रशाशन से उम्मीद है और न ही पार्टियों के तौर पर बीके हुए मिडिया से और राजनीतिज्ञों की बात ही क्या आज तो बौने कद का राजनेता भी करोड़ पति है, कहते है न की "जब बौनों के साये मिलो लम्बे होने लगे तो समझ लेना चाहिए की दिन का अंत आ रहा है "

इसी सोच को लेकर आज हम सबके लिए, हमारी आने वाली पीढियों के लिए आदरणीय श्री अन्ना हजारे जी आमरण अनशन पर बैठे है, ये लड़ाई सिर्फ उनकी नहीं है, हमारी है,हम सब की है; हर हिन्दुस्तानी की है चाहे वो किसी भी जाति, धर्म और मजहब का हो, चाहे किसी भी देश में रहता हो, मेरा आह्वान है आपसे की आप जहा कही भी है भ्रष्टाचार से लड़ने का संकल्प ले, हो सकता है आज तक हमने खुद भी जाने अनजाने भरष्ट लोगो और परिस्थितियों का साथ दिया हो लेकिन अब बस्स और नहीं..
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और अन्ना को आज युवाओ के साथ की जरुरत है, क्युकी हमें ही आगे दुनिया देखनी है , और कहा गया है की
"जिस और जवानी चलती है उस और जमाना चलता है"
युवा का मतलब होता है वायु और अगर ये युवा तूफ़ान बनकर निकल जाय तो भ्रष्टाचार सूखे पत्ते की तरह उड़ जायेगा ...

हमारा है बस एक सवाल
हमको चाहिए जन लोकपाल

जय हिंद , जय भारत

Wednesday, April 6, 2011

सवाल कांग्रेसी दलालों के और जवाब अन्ना के....

सरकारी आरोप, अन्ना के जवाब
1. अभिषेक मनु सिंघवी-अन्ना को कुछ लोगों ने अनशन के लिए उकसाया
अन्ना : मैं बच्चा नहीं कि कोई भड़का कर आमरण अनशन पर बिठा दे
2. जयंती नटराजन-अनशन का अन्ना का फैसला जल्दबाजी में उठाया कदम है
अन्ना : उतावला होने पर खुशी है। भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकारी सुस्ती से सारा देश उतावला हो गया है।
3. वीरप्पा मोइली-अन्ना की मांगों के सिलसिले में सरकार में जीओएम के जरिए प्रक्रिया चल रही है।
अन्ना : अगर मंत्रियों के समूह से भ्रष्टाचार दूर होता तो आज मुल्क की यह हालत नहीं होती।

Thursday, February 24, 2011

मालामुर्ती का दौरा और दलितों की टूटती हड्डिया

आखिर मालामुर्ती ऊप्स मायावती नाम की दौलत की बेटी अपने मांद से बाहर आ ही गयी, जो मायावती कभी अपने सांसदों, विधायको से नहीं मिलती थी, बड़े बड़े सम्मेलनों में जो अपने कार्यकर्ताओं को मानव बम या अछूत समझती थी, और उनसे बचकर जिसला हेलीकाप्टर सीधे वातानुकूलित मंच के पास उतरता था , आज वो प्रदेश के हवाई दौरे पर निकली है, ये अलग बात है की सारे औचक ??? दौरे पूर्व नियोजित होते है, और जनता को इज़ाज़त नहीं होती मायावती से मिलने की , वहा मायावती होती है उनके जूते साफ़ करता कोई चमचा होता है, हाथो में अटैची पकडे अधिकारी होते है, और लोगो के बरिकेडिंग से बाहर निकलने पर टूटते हाथ और हड्डिया और उन्हे तोडती पुलिस की लाठिया होती है..

जो काम पिछले ४ साल से उत्तर प्रदेश की रसातल में जाती कानून व्यवस्था नहीं करवा पाई, हताश होता युवा वर्ग नहीं करवा पाया, सडको पर बहता खून नहीं करवा पाया, दलितों की लुटती इज्ज़त ,सडको पर बहता खून, भूख से मरने की तकदीर नहीं करवा पाई, अपनी बहन जी से चकनाचूर होती उम्मीदे नहीं करवा पाई, जो काम प्रदेश के बिकते थाने और तहसील नहीं करवा पाए, बसपा में भरते गुंडे नहीं करवा पाए और जो काम उत्पीडित लेकिन सुनवाई से लाचार दलित और नकली दलित उत्पीडन में फसता सर्वसमाज नहीं करवा पाया , बलात्कार में नाकाम होने पर दलित लडकियों के कटते हाथ और पैर नहीं करवा पाए वो काम प्रदेश में अगले साल या संभवतः इसी साल होने वाले चुनाव ने करवा दिए,

मालामुर्ती बाहर आ गयी, और उन्होने प्रदेश का दौरा करना शुरू किया , लोगो में उम्मीद जगी की शायद बहन जी अब सुधर गयी है , लेकिन ये क्या मायावती का ये दौरा तो उन गरीब और निरीह लोगो के लिए बवाल साबित हुआ जिनके वोट के दम पर वो तानाशाह और कहने के लिए ही सही लेकिन नोट के दम पर सबसे अमीर मुख्यमंत्री बनी हुई है. ये अलग बात है की वो दलित आज भी भूख से मरता है जैसे की फतेहपुर में एक दलित के पोस्टमार्टम में उसके पेट से सिर्फ पानी निकला, आज भी नेताओं के बांटे नकली कंबलो से ठिठुर ठिठुर कर रात गुजारता है सबसे पहले तो मलामुर्ती के चहेते मंत्री द्वारा करवाई गयी हत्या के शिकार दलित की बेटी को बेहें जी से शिकायत करने की कोशिश करने पर बाल पकड़ कर पॉलिसियो ने खीच कर सड़क पर पटक दिया और अब वो लड़की ही जेल में है, जैसे की बांदा की शीलू निषाद और इटावा में हुआ (महिलाओं के इतना सम्मान मलामुर्ती के राज्य में ही संभव है ).कई जगह धमकी दी गयी की बहन जी से मिले तो मिले हुए आवास भी छीन लिए जायेंगे
http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttarpradesh/4_1_7344512_1.html


जहा जहा मुख्यमंत्री गयी वहा वहा कर्फ्यू लगा दिया गया , दलित माहिलाओ को उठाया गया, दलितों की फसलो को उखाड़ कर बहन जी के लिए हेलीपैड बनाये गए और पीड़ित को ही थाने में रख दिया गया
http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttarpradesh/4_1_7344483_1.html



..और तो और बहन जी से मिलने की कोशिश करते एक दलित युवक की तो पोलिसे वालो ने मार कर हाथ पैर तोड़ दिया और उसे गठरी बना कर गली में फेक कर भूल गए , वो ता भला हो मानवता की कुछ लोग उन्हे अस्पताल ले गएये दलित युवक इस अहसान फरामोश को में अपने हाथो 1993 से नाश्ता परोस चुका था,

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttarpradesh/4_1_7344495_1.html

और चलते चलते: लेकिन मालामुर्ती जान ले की जनता 4 साल से देख रही है की कही मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी का उद्घाटन किया हुआ पुल दुसरे दिन भरभराकर ढह गया तो कही स्कूल की छत जमिन्दोज़ हो गयी, कही हजरत गंज में लंप पोस्ट गिरने से युवक मर जाता है तो कही सड़क ही पूरी धंस जाती है, ६ मंत्री लोकायुक्त की जांच में है तो जनता के दबाव और अदालत के निर्देश पर बसपा के दर्जनों विधायक और मंत्री जेल में है, सचिवालय का अधिकारी वसूली का कोटा पूरा न कर पाने पर आत्महत्या कर लेता है तो बुंदेलखंड में इमानदार और लोकप्रिय कलक्टर को निपटाया जाता है तो पूर्वांचल में दण्डित भ्रष्ट अधिकारी से अटैची लेकर सजा माफ़ कर दी जाती है, ये घाव ये नासूर इन दौरों से नहीं भरेंगे मालामुर्ती जी...

Friday, January 21, 2011

सोनिया के स्विस खातों में जमा है दस हजार करोड़

जिस दिन कैबिनेट का विस्तार किया गया उस दिन पत्रकारों ने प्रधानमंत्री से पूछा कि देश के बाहर रखे काले धन के बारे में उनकी सरकार क्या फैसला ले रही है तो प्रधानमंत्री ने विभिन्न देशों से संधियों का हवाला देते हुए कहा था कि ऐसा करना संभव नहीं है. लेकिन क्या प्रधानमंत्री सच बोल रहे हैं? ईमानदारी में आकंठ डूबे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह क्या सोनिया गांधी सहित उन लोगों को बचाने की कवायद कर रहे हैं जिनके पैसे स्विस बैंकों में जमा हैं?

हालांकि अभी तक न तो केन्द्र सरकार की ओर से वह लिस्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपी गयी है जो उसे जर्मन सरकार से प्राप्त हुई है और न ही विकीलीक्स ने उन नामों का खुलासा किया है जो भारत से संबंध रखते हैं और जिनका काला धन स्विस बैंकों में जमा है. लेकिन ऐसे वक्त में एक पुराने खुलासे को लोग भूल रहे हैं जो आज से बहुत पहले 1991 में हुआ था. यह वही साल था जब राजीव गांधी की निर्मम हत्या कर दी गयी थी इसलिए इस खुलासे पर उस वक्त देश ने बहुत कान नहीं दिया था. क्योंकि यह खुलासा उनकी हत्या के छह महीने बाद 19 नवंबर 1991 को हुआ था.

यह खुलासा किसी और ने नहीं बल्कि स्विटजरलैण्ड की पापुलर मैगजीन स्वेजर इलस्ट्रेट ने किया था. जिसका सर्कुलेशन सवा दो लाख कॉपी का है और जिसे करीब नौ लाख लोग पढ़ते हैं. स्वेजर इलस्ट्रेट के 19 नवंबर 1991 के अंक में केजीबी के सार्वजनिक हुए रिकार्ड के हवाले से एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी जिसमें उसने बताया था कि राजीव गांधी ने घूस मिले धन को स्विस बैंकों में जमा करवाया है. स्वेजर इलस्ट्रेट ने बताया था कि "राजीव गांधी के इन गुप्त खातों को सोनिया गांधी संचालित करती हैं. राजीव गांधी की मौत के बाद ये खाते राहुल गांधी के नाम से संचालित किये जाते हैं. उस वक्त स्वेजर इलस्ट्रेट ने खुलासा किया था कि राजीव गांधी (बाद में राहुल गांधी) के नाम से चलनेवाले इन खातों में 2.5 अरब स्विस फ्रेंक जमा हैं. ये पैसे 1988 से पहले स्विस खातों में जमा करवाये गये थे. आज अगर हम केवल उतने ही धन का भारतीय रूपयों में मूल्यांकन करें तो आंकड़ा करीब 10,000 करोड़ का बैठता है. यह बात दीगर है कि उसके बाद 2004 से केन्द्र में सोनिया गांधी की अगुवाई वाली यूपीए सरकार काम कर रही है और न जाने इस धन में कितना इजाफा हुआ होगा. लेकिन आधिकारिक तौर पर इतना तो कहा ही जा सकता है कि राहुल गांधी के नाम पर स्विस खातों में दस हजार करोड़ रूपये जमा हैं.फिर भी काले धन पर काम रहे लोगों का आंकलन है कि सोनिया गांधी के स्विस नियंत्रित खातों में ही आज कम से कम 45 हजार करोड़ से 85 हजार करोड़ रूपये के बीच कोई राशि जमा हो सकती है.

फिर भी इस पुराने खुलासे को याद करते हुए हमें स्विस बैंक के नये खातों में जमा काले धन के खुलासों का इंतजार है.

FROM: VISFOT