Sunday, April 29, 2012

सत्ता का गुरूर


कर्नाटक के तुमकुर में शनिवार, 28 अप्रैल को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को काले झंडे दिखाने वाली महिला की पुलिस ने जमकर पिटाई की। सोनिया यहां सिद्धगंगा मठ के प्रमुख शिवकुमार स्वामी के 105वें जन्मदिन पर आयोजित गुरु वंदना महोत्सव में हिस्सा लेने पहुंची थीं। क्या कांग्रेस की राजमाता और उनके युवराज को झंडा दिखाना इतना बड़ा गुनाह है की एक महिला के मान सम्मान को ताक पर रखकर उसे पीटा जाता है , उसका मुह दबाया जाता है, आखिर किस तरह की महिला है आप सोनिया जी, और कर्नाटक की बीजेपी सरकार और उसके पुलिस वालो को भी सलाम है ये साबित करने के लिए की कांग्रेस और बीजेपी एक सिक्के के दो पहलू है और दोनों के लिए एक दुसरे को विरोध से बचाना एक महिला के मान और सम्मान से कही ज्यादा है और कांग्रेस ने तो खैर गुंडागर्दी की दौड़ में सबको पीछे छोड़ दिया है कही सांसद , विधायक इलाहबाद संसद सड़क छाप गुंडों की तरह छात्रो को बेशर्मी से से पिटते है,तो कही दिग्गी विपक्षी कार्यकर्ताओं और मीडिया को पिटता है. अब देश को एक विकल्प चाहिए, बदलाव चाहिए, हर किसी के मन से ये भावना निकालनी होगी की सत्ता उसकी गुलाम है...

Tuesday, May 10, 2011

खामोश,कब्ज़ा जारी है..

आज उत्तर प्रदेश के किसान आन्दोलन के बारे में पढ़कर मालामूर्ति माफ़ कीजियेगा मायावती जी को धन्यवाद देने का दिल कर आया की भले ही हम अंग्रेज शाशन काल में नहीं पैदा हुए लेकिन मायावती सरकार ने ये तो दिखा ही दिया की अंग्रेज शासन इससे बर्बर नहीं रहा होगा, और की किस तरह अंग्रेज नील की खेती के लिए किसानो की जमीं कब्जाते थे और उनके इशारे पर हमारी भारतीय पुलिस विरोध करते किसानो के सीने छलनी कर दिया करती थी.

अहसास होता है की किस तरह और किन परिस्थितियों में भगत सिंह जी, चंद्रशेखर आजाद और हजारो क्रन्तिकारी बंदूके लेकर अपनी आराम की जिंदगी छोड़कर निकल पड़े होंगे अंग्रेजो और अपने ही भारतीय पुलिस वालो को सबक सिखाने.

मैंने आज से तीन साल पहले ही बलिया में पुलिसिया गुंडई देखकर लिखा था की यही हाल रहा तो वो दिन दूर नहीं जब पोलिस को भी आम जनता के गुस्से का शिकार होना पड़ेगा, जिस तरह से सहारनपुर से लेकर सोनभद्र तक और बुलंदशहर से लेकर बलिया तक, गाजियाबाद से लेकर गाजीपुर तक और आगरा से लेकर अलाहाबाद तक कही ताज कोरिडोर तो कही गंगा एक्सप्रेस वे तो कही यमुना एक्सप्रेस वे के नाम पर चन्द सिक्को और बंदूको के दम पर किसानो की जमीं कब्जाई जा रही है और जिस तरह जेपी ग्रुप के फायदे के लिए दलितों तक के गाँव के गाँव उजाड़ दिए जा रहे है उससे लोगो में गुस्सा और भड़का है.

आखितर चार महीने से किसान आन्दोलन कर रहे थे तो क्यों नहीं सरकार ने उनकी सुध ली और कब्ज़ा जारी रक्खा ? क्यों ये सरकार हर आन्दोलन को लाठी और गोली से दबाने पर लगी हुई है?

२००७ से आज तक ८ बार यूपी के किसानो पर गोलिया चल चुकी है जिसमे दर्जन भर से ज्यादा किसान मरे गए है.अभी भत्ता गाँव के दर्जनों किसान लापता है और आप जानेगे की इन्हे पुलिस वालों के जानलेवा गुस्से का शिकार होना पड़ा है और शायद ये अब कभी वापस नहीं आयेंगे (और ऐसे कामो में हमारी पुलिस वैसे भी निपुण है) किसानो की बात करने वाले उनके हक़ के लिए आवाज उठाने वालो पर इनाम रखे जा रहे है क्यों नहीं भड़केगा किसानो का गुस्सा ??

कभी पढता था की विदेशी आक्रमण कारी आते थे तो फसलो को जलाते हुए, घरो को आग लगते हुए और गाँव को घेर कर कत्लेआम करते हुए आते थे , आज कमोबेश यही हालत उत्तर प्रदेश में हो गयी है, अब पोलिस को निरंकुश हो गयी है क्युकी उन्हे अपने आकाओं को खुश रखना है..

सरकार को सोचना होगा की आखिर क्यों शांत रहने वाला किसान आज इतना उग्र हो गया है, धरती किसान की माँ होती है, उसके पेट भरने का जरिया होती है और ये कुछ हजार रुपये का मुआवजा जमीन की जगह नहीं ले सकता.

पुलिस के जवानों की मौत का दुःख सबको है लेकिन जब तक पुलिस और पीएसी के जवान इस मानसिकता से नहीं निकालेंगे की वर्दी ने उनको किसी को भी कुचलने का हक दे सिया है , जनता का गुस्सा ऐसे ही फूटता रहेगा, अगर सरकार सोचती है की इस तरह पुलिस, कत्लेआम, दबंगई और और दबाव से इस मामले को शांत कर लिया जायेगा तो ये उसकी भूल है, ये दबाव उस प्रेसर कूकर की तरह विस्फोट करेगा जिसकी भाप नहीं निकल पाती.


सरकार इसे उपद्रव का नाम देकर बच नहीं सकती क्युकी ये किसान आन्दोलन है और ऐसे आन्दोलन इतिहास तक बदल देते है, सरकारे तो बहुत छोटी चीज है.

Friday, April 8, 2011

आव्हान अन्ना के साथ, भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग का एक सिपाही बनने का ..

मेरे दोस्तों और साथियों;

मै अपने हर उस साथी का आव्हान करता हु जो आज देश के बाहर है, चाहे वो दुनिया के किसी भी हिस्से में रह रहे हो..हम कही भी रहे लेकिन देश के लिए अपने फर्ज अपनी जिम्मेदारियों से अलग नहीं हो सकते, देश के कर्ज से मुह नहीं छ्हुपा सकते, इसलिए चाहे अनचाहे हमें भी हर उस घटना का, हर उस किस्से का और हर उस नामी और बदनामी का हिस्सा बना पड़ता है जो भारत के , हमारे देश के हमारी मातृभूमि के साथ जुडी होती है.

आज देश में हालात बहुत खराब चल रहे हैं, सत्ता में बैठी हुई सरकारे देशों और प्रदेशो को बेदर्दी से लूट रही है, नोच खसोट रही है, जनता को सरकारे चुनने की सजा दी जा रही है, कभी संसद खरीदे जा रहे है तो कही ईमान बेचा जा रहहै, आत्मा और जमीर बेचीं जा रही है, देश में लगातार घोटालो की बढ़ आ रही है कभी 70000 करोड़ का कामनवेल्थ घोटाला आता है तो उसके बाद 172000 करोड़ का 2G स्पेक्ट्रुम,सैनिको के घरो पर भ्रष्ट नेता मुख्यमंत्री हथियाते है और उसे आदर्श नाम दिया जाता है तो कभी गेहू एक्सपोर्ट तो कभी चीनी और कभी चावल घोटाला, एक भ्रष्ट अधिकारी को सबसे बड़ा भ्रष्टाचार विरोधी अधिकारी बनाया जाता है तो शरद पवार जैसा भ्रष्ट नेता भ्रष्टाचार निरोधी कमिटी का सदस्य बनाया जाता है. तो कभी एक ख़त्म नहीं होता तब तक दूसरा फिर तीसरा लेकिन हम इसे अंतहीन सिलसिले में नहीं बदलने देंगे क्युकी न तो अब प्रशाशन से उम्मीद है और न ही पार्टियों के तौर पर बीके हुए मिडिया से और राजनीतिज्ञों की बात ही क्या आज तो बौने कद का राजनेता भी करोड़ पति है, कहते है न की "जब बौनों के साये मिलो लम्बे होने लगे तो समझ लेना चाहिए की दिन का अंत आ रहा है "

इसी सोच को लेकर आज हम सबके लिए, हमारी आने वाली पीढियों के लिए आदरणीय श्री अन्ना हजारे जी आमरण अनशन पर बैठे है, ये लड़ाई सिर्फ उनकी नहीं है, हमारी है,हम सब की है; हर हिन्दुस्तानी की है चाहे वो किसी भी जाति, धर्म और मजहब का हो, चाहे किसी भी देश में रहता हो, मेरा आह्वान है आपसे की आप जहा कही भी है भ्रष्टाचार से लड़ने का संकल्प ले, हो सकता है आज तक हमने खुद भी जाने अनजाने भरष्ट लोगो और परिस्थितियों का साथ दिया हो लेकिन अब बस्स और नहीं..
.
और अन्ना को आज युवाओ के साथ की जरुरत है, क्युकी हमें ही आगे दुनिया देखनी है , और कहा गया है की
"जिस और जवानी चलती है उस और जमाना चलता है"
युवा का मतलब होता है वायु और अगर ये युवा तूफ़ान बनकर निकल जाय तो भ्रष्टाचार सूखे पत्ते की तरह उड़ जायेगा ...

हमारा है बस एक सवाल
हमको चाहिए जन लोकपाल

जय हिंद , जय भारत

Wednesday, April 6, 2011

सवाल कांग्रेसी दलालों के और जवाब अन्ना के....

सरकारी आरोप, अन्ना के जवाब
1. अभिषेक मनु सिंघवी-अन्ना को कुछ लोगों ने अनशन के लिए उकसाया
अन्ना : मैं बच्चा नहीं कि कोई भड़का कर आमरण अनशन पर बिठा दे
2. जयंती नटराजन-अनशन का अन्ना का फैसला जल्दबाजी में उठाया कदम है
अन्ना : उतावला होने पर खुशी है। भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकारी सुस्ती से सारा देश उतावला हो गया है।
3. वीरप्पा मोइली-अन्ना की मांगों के सिलसिले में सरकार में जीओएम के जरिए प्रक्रिया चल रही है।
अन्ना : अगर मंत्रियों के समूह से भ्रष्टाचार दूर होता तो आज मुल्क की यह हालत नहीं होती।

Thursday, February 24, 2011

मालामुर्ती का दौरा और दलितों की टूटती हड्डिया

आखिर मालामुर्ती ऊप्स मायावती नाम की दौलत की बेटी अपने मांद से बाहर आ ही गयी, जो मायावती कभी अपने सांसदों, विधायको से नहीं मिलती थी, बड़े बड़े सम्मेलनों में जो अपने कार्यकर्ताओं को मानव बम या अछूत समझती थी, और उनसे बचकर जिसला हेलीकाप्टर सीधे वातानुकूलित मंच के पास उतरता था , आज वो प्रदेश के हवाई दौरे पर निकली है, ये अलग बात है की सारे औचक ??? दौरे पूर्व नियोजित होते है, और जनता को इज़ाज़त नहीं होती मायावती से मिलने की , वहा मायावती होती है उनके जूते साफ़ करता कोई चमचा होता है, हाथो में अटैची पकडे अधिकारी होते है, और लोगो के बरिकेडिंग से बाहर निकलने पर टूटते हाथ और हड्डिया और उन्हे तोडती पुलिस की लाठिया होती है..

जो काम पिछले ४ साल से उत्तर प्रदेश की रसातल में जाती कानून व्यवस्था नहीं करवा पाई, हताश होता युवा वर्ग नहीं करवा पाया, सडको पर बहता खून नहीं करवा पाया, दलितों की लुटती इज्ज़त ,सडको पर बहता खून, भूख से मरने की तकदीर नहीं करवा पाई, अपनी बहन जी से चकनाचूर होती उम्मीदे नहीं करवा पाई, जो काम प्रदेश के बिकते थाने और तहसील नहीं करवा पाए, बसपा में भरते गुंडे नहीं करवा पाए और जो काम उत्पीडित लेकिन सुनवाई से लाचार दलित और नकली दलित उत्पीडन में फसता सर्वसमाज नहीं करवा पाया , बलात्कार में नाकाम होने पर दलित लडकियों के कटते हाथ और पैर नहीं करवा पाए वो काम प्रदेश में अगले साल या संभवतः इसी साल होने वाले चुनाव ने करवा दिए,

मालामुर्ती बाहर आ गयी, और उन्होने प्रदेश का दौरा करना शुरू किया , लोगो में उम्मीद जगी की शायद बहन जी अब सुधर गयी है , लेकिन ये क्या मायावती का ये दौरा तो उन गरीब और निरीह लोगो के लिए बवाल साबित हुआ जिनके वोट के दम पर वो तानाशाह और कहने के लिए ही सही लेकिन नोट के दम पर सबसे अमीर मुख्यमंत्री बनी हुई है. ये अलग बात है की वो दलित आज भी भूख से मरता है जैसे की फतेहपुर में एक दलित के पोस्टमार्टम में उसके पेट से सिर्फ पानी निकला, आज भी नेताओं के बांटे नकली कंबलो से ठिठुर ठिठुर कर रात गुजारता है सबसे पहले तो मलामुर्ती के चहेते मंत्री द्वारा करवाई गयी हत्या के शिकार दलित की बेटी को बेहें जी से शिकायत करने की कोशिश करने पर बाल पकड़ कर पॉलिसियो ने खीच कर सड़क पर पटक दिया और अब वो लड़की ही जेल में है, जैसे की बांदा की शीलू निषाद और इटावा में हुआ (महिलाओं के इतना सम्मान मलामुर्ती के राज्य में ही संभव है ).कई जगह धमकी दी गयी की बहन जी से मिले तो मिले हुए आवास भी छीन लिए जायेंगे
http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttarpradesh/4_1_7344512_1.html


जहा जहा मुख्यमंत्री गयी वहा वहा कर्फ्यू लगा दिया गया , दलित माहिलाओ को उठाया गया, दलितों की फसलो को उखाड़ कर बहन जी के लिए हेलीपैड बनाये गए और पीड़ित को ही थाने में रख दिया गया
http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttarpradesh/4_1_7344483_1.html



..और तो और बहन जी से मिलने की कोशिश करते एक दलित युवक की तो पोलिसे वालो ने मार कर हाथ पैर तोड़ दिया और उसे गठरी बना कर गली में फेक कर भूल गए , वो ता भला हो मानवता की कुछ लोग उन्हे अस्पताल ले गएये दलित युवक इस अहसान फरामोश को में अपने हाथो 1993 से नाश्ता परोस चुका था,

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttarpradesh/4_1_7344495_1.html

और चलते चलते: लेकिन मालामुर्ती जान ले की जनता 4 साल से देख रही है की कही मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी का उद्घाटन किया हुआ पुल दुसरे दिन भरभराकर ढह गया तो कही स्कूल की छत जमिन्दोज़ हो गयी, कही हजरत गंज में लंप पोस्ट गिरने से युवक मर जाता है तो कही सड़क ही पूरी धंस जाती है, ६ मंत्री लोकायुक्त की जांच में है तो जनता के दबाव और अदालत के निर्देश पर बसपा के दर्जनों विधायक और मंत्री जेल में है, सचिवालय का अधिकारी वसूली का कोटा पूरा न कर पाने पर आत्महत्या कर लेता है तो बुंदेलखंड में इमानदार और लोकप्रिय कलक्टर को निपटाया जाता है तो पूर्वांचल में दण्डित भ्रष्ट अधिकारी से अटैची लेकर सजा माफ़ कर दी जाती है, ये घाव ये नासूर इन दौरों से नहीं भरेंगे मालामुर्ती जी...

Friday, January 21, 2011

सोनिया के स्विस खातों में जमा है दस हजार करोड़

जिस दिन कैबिनेट का विस्तार किया गया उस दिन पत्रकारों ने प्रधानमंत्री से पूछा कि देश के बाहर रखे काले धन के बारे में उनकी सरकार क्या फैसला ले रही है तो प्रधानमंत्री ने विभिन्न देशों से संधियों का हवाला देते हुए कहा था कि ऐसा करना संभव नहीं है. लेकिन क्या प्रधानमंत्री सच बोल रहे हैं? ईमानदारी में आकंठ डूबे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह क्या सोनिया गांधी सहित उन लोगों को बचाने की कवायद कर रहे हैं जिनके पैसे स्विस बैंकों में जमा हैं?

हालांकि अभी तक न तो केन्द्र सरकार की ओर से वह लिस्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपी गयी है जो उसे जर्मन सरकार से प्राप्त हुई है और न ही विकीलीक्स ने उन नामों का खुलासा किया है जो भारत से संबंध रखते हैं और जिनका काला धन स्विस बैंकों में जमा है. लेकिन ऐसे वक्त में एक पुराने खुलासे को लोग भूल रहे हैं जो आज से बहुत पहले 1991 में हुआ था. यह वही साल था जब राजीव गांधी की निर्मम हत्या कर दी गयी थी इसलिए इस खुलासे पर उस वक्त देश ने बहुत कान नहीं दिया था. क्योंकि यह खुलासा उनकी हत्या के छह महीने बाद 19 नवंबर 1991 को हुआ था.

यह खुलासा किसी और ने नहीं बल्कि स्विटजरलैण्ड की पापुलर मैगजीन स्वेजर इलस्ट्रेट ने किया था. जिसका सर्कुलेशन सवा दो लाख कॉपी का है और जिसे करीब नौ लाख लोग पढ़ते हैं. स्वेजर इलस्ट्रेट के 19 नवंबर 1991 के अंक में केजीबी के सार्वजनिक हुए रिकार्ड के हवाले से एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी जिसमें उसने बताया था कि राजीव गांधी ने घूस मिले धन को स्विस बैंकों में जमा करवाया है. स्वेजर इलस्ट्रेट ने बताया था कि "राजीव गांधी के इन गुप्त खातों को सोनिया गांधी संचालित करती हैं. राजीव गांधी की मौत के बाद ये खाते राहुल गांधी के नाम से संचालित किये जाते हैं. उस वक्त स्वेजर इलस्ट्रेट ने खुलासा किया था कि राजीव गांधी (बाद में राहुल गांधी) के नाम से चलनेवाले इन खातों में 2.5 अरब स्विस फ्रेंक जमा हैं. ये पैसे 1988 से पहले स्विस खातों में जमा करवाये गये थे. आज अगर हम केवल उतने ही धन का भारतीय रूपयों में मूल्यांकन करें तो आंकड़ा करीब 10,000 करोड़ का बैठता है. यह बात दीगर है कि उसके बाद 2004 से केन्द्र में सोनिया गांधी की अगुवाई वाली यूपीए सरकार काम कर रही है और न जाने इस धन में कितना इजाफा हुआ होगा. लेकिन आधिकारिक तौर पर इतना तो कहा ही जा सकता है कि राहुल गांधी के नाम पर स्विस खातों में दस हजार करोड़ रूपये जमा हैं.फिर भी काले धन पर काम रहे लोगों का आंकलन है कि सोनिया गांधी के स्विस नियंत्रित खातों में ही आज कम से कम 45 हजार करोड़ से 85 हजार करोड़ रूपये के बीच कोई राशि जमा हो सकती है.

फिर भी इस पुराने खुलासे को याद करते हुए हमें स्विस बैंक के नये खातों में जमा काले धन के खुलासों का इंतजार है.

FROM: VISFOT

Friday, January 7, 2011

कश्मीर और तिरंगा...


आज कल एक न्यूज़ पढ़ रहा हु की भारतीय जनता पार्टी, जो की अपने गुटबाजी और नजदीक के फायदे के चक्कर में दूर का नुकसान न देख सकने की वजह से देश में लगातार सिकुड़ती जा रही है, वो तो भला हो गुजरात, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड का का जिन्होने शान बनाये रक्खी है और हाल ही में संपन्न हुए बिहार विधानसभा चुनावों के 90% की सफलता दर का भी जिक्र करना समीचीन होगा ने अपनी प्रासंगिकता और सुर्खियों में रहने के लिए नया लेकिन प्रासंगिक टोटका खोजा, पदयात्रा और कश्मीर के लाल चौक पर झंडा रोहन..

तो भाई, भारतीय जनता पार्टी के युवा नेता और सांसद अनुराग ठाकुर ने निशचय किया की वो कोलकाता से कश्मीर तक भारत की अखंडता के लिए एक पदयात्रा निकालेंगे और श्रीनगर के ऐतिहासिक विख्यात या कुख्यात जो भी कह ले, लाल चौक पर तिरंगा फहराएंगे, एक नजर देखने में तो ये एक सीधी सी योजना लगती है और इसमें कुछ भी गलत नहीं लगता लेकिन व्यक्तिगत रूप से घाटी के जो हालत है उससे मुझे भी लगता है की ये समय सही नहीं था, लेकिन अब इस कदम ने एक बहुत बडे़ विवाद को जन्म दे दिया

समस्या की शुरुआत हुई एक देशद्रोही, कश्मीर के गली के कुत्ते यासीन मालिक नाम के गद्दार के इस बयान से की लाल चौक पर तिरंगा नहीं फहराने देंगे,
http://in.jagran.yahoo.com/news/national/politics/5_2_7133622.html


जैसे की लाल चौक इनके पिताजी ने इन्हे बपौती छोडी़ हो...लेकिन मुझे लगा की जैसे भारत सरकार कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग मानती है और हाल ही में सपा नेता मोहम्मद आज़म खान के उस बयान पर की गुलाम नबी आजाद तो कश्मीरी है, भाजपा के ही साथ कांग्रेस के सभी देश और प्रदेश स्तर के नेताओं ने खूब फुदक मचाई थी और भारत को कश्मीर का अभिन्न अंग बताया और आज़म साहब और समाजवादी पार्टी पर बयानों की बम वर्षा कर दी तो मुझे लगा की शायद अब बेचारे मानसिक रोगी, विक्छिप्त यासीन को जेल में दाल दिया जाय और लाल चौक पर मुख्यमंत्री खुद जाय तिरंगा फहराने..

लेकिन आश्चर्य !!!!!!! जम्मू- कश्मीर का बच्चा सा मुख्यमंत्री फुदका और उसने कहा की अगर लाल चौक पर भारतीय तिरंगा फहराया गया तो हालत बिगड़ जायेंगे और उसकी जिम्मेदारी भाजपा की होगी..

http://in.jagran.yahoo.com/news/national/politics/5_2_7134304.html

सुन कर मै आश्चर्यचकित रह गया...आखिर किस तरह के लोकतंत्र में रहते है हम जहा अपने देश में अपना राष्ट्रिय ध्वज नहीं फहराया जा सकता.....क्यों एक दो कौडी़ का गुंडा पाकिस्तान का ध्वज फहरा सकता है और भारतीय ध्वज फहराए जाने पर धमकी देने की हिम्मत कर सकता है....क्यूँ नहीं ऐसे लोगो को जेल में डालना चाहिए, या नजरबन्द कर देना चाहिए और या फिर गोली मार देनी चाहिए...क्यों ज्यादातर कश्मीरी मुस्लिम युवा आतंकवादी मार दिए जाते है जिन्हे की सुधार जा सकता है और आतंकवाद की नर्सरी ये कुत्ते देश के पैसे और सुविधाए खाकर नेता बने रहते है..
.आखिर कब तक हम पत्तिया तोड़ कर पेड़ के गिरने का इंतजा़र करेंगे, क्यों नहीं पेड़ की जड़ को ही काट दिया जाता ??

एक भारतीय होने के नाते मै महसूस करता हु की अब भाजपा भले ही अपने कार्यक्रम से हट जाये लेकिन जम्मू कश्मीर और भारत सरकार को लाल चौक पर झंडा फहराना चाहिए और ये भी जनता हु की ज्यादातर कश्मीरी भी इस बात से सहमत होंगे सिर्फ यासीन और उसके जैसे कुछ देशद्रोहियों के अलावा, ये वक़्त है साबित करने के की कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत एक है.....और अगर कांग्रेस या अब्दुल्लाह साहब देश के मुकुट को नहीं संभाल सकते तो सिर्फ कोरी बयान बाजी और अखबारों में कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बताना बंद करे....

Monday, December 13, 2010

लोकतंत्र के राजा.....

राजतंत्र नहीं रहा, उसकी जगह प्रजातंत्र आ गया, लेकिन अंतर क्या आया? अब एक राजा की जगह कई राजा मिल कर आम आदमी का शोषण करते हैं, वह भी इतनी सफाई से कि आम आदमी को भनक तक नहीं लगती. कुछ ऐसे ही राजाओं की ख़बर ली है चौथी दुनिया ने. आरटीआई से मिली सूचना के मुताबिक़, इन राजाओं की प्यास बुझाने के लिए आम आदमी को अपनी करोडों़ की कमाई गंवानी पड़ रही है. अपना घर अंधेरे में रखकर राजाओं के आलीशान महलों (मुख्यमंत्री आवास) को रोशन कर रहा है आम आदमी. खु़द के सिर पर छत नहीं, लेकिन वह इन राजाओं के महलों की पेंटिंग पर ही लाखों रुपये ख़र्च कर रहा है.

राज्य के मुख्यमंत्री भी जनता की जेब ढीली कर सुख-सुविधा भोगने में पीछे नहीं हैं. वह भी तब, जब दिल्ली जैसे शहर में 80 हजा़र से ज़्यादा लोगों के सिर पर छत नहीं है. विदर्भ में अब तक 2 लाख से ज़्यादा किसान असमय मौत को गले लगा चुके हैं. उत्तर प्रदेश में हर साल सैकडों़ बच्चे इंसेफ्लाइटिस की वजह से दम तोड़ देते हैं, लेकिन इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों की जीवनशैली पर नज़र डालें तो एक अलग ही तस्वीर दिखाई देती है. चमक-दमक से भरपूर तस्वीर. बिल्कुल इंडिया शाइनिंग की तरह. जिस देश की एक बडी़ आबादी को पीने का साफ पानी मयस्सर नहीं, वहीं इन राज्यों में से एक के मुख्यमंत्री आवास का पानी का बिल 62 लाख रुपये आए तो इसे आप क्या कहेंगे? उत्तर प्रदेश या महाराष्ट्र के कितने गांवों तक बिजली पहुंची है. और अगर पहुंचती भी है तो कितने घंटों के लिए, यह रिसर्च का मामला हो सकता है, लेकिन इन दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री अपने आवास को रोशन करने के लिए महीने में 20 लाख रुपये से ज़्यादा बिजली पर ख़र्च कर देते हों तो इसे आप क्या कहेंगे? चौथी दुनिया ने उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र एवं दिल्ली के मुख्यमंत्री आवास पर होने वाले ख़र्च का ब्योरा आरटीआई के ज़रिए जुटाया है. प्राप्त सूचना के विश्लेषण से पता चलता है कि कैसे आम आदमी की गाढी़ कमाई इन राज्यों के मुख्यमंत्री आवासों पर बेहिसाब ख़र्च की जा रही है.

प्रधानमंत्री भले ही अपने मंत्रियों को विदेश दौरे न करने, सरकारी ख़र्च घटाने की सलाह देते रहते हैं, लेकिन महाराष्ट्र में उन्हीं की पार्टी के मुख्यमंत्री अपने आवास की रंगाई-पुताई पर पांच सालों में 86 लाख रुपया पानी की तरह बहा देते हैं. उत्तर प्रदेश में मायावती की शाही आदत के मुताबिक़ ही उनके आवास के रखरखाव पर बेशुमार पैसा ख़र्च किया जा रहा है. और यह सब कुछ हो रहा है एक ऐसे देश में, जहां का हर तीसरा नागरिक ग़रीब है. 70 फीसदी आबादी की रोज की आय 20 रुपये से भी कम है. ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2009 के आंकडों़ के मुताबिक़, भारत में भूखे एवं कुपोषित लोगों की संख्या पाकिस्तान, नेपाल, सूडान, पेरू, मालावी और मंगोलिया जैसे देशों से भी ज़्यादा है. पांच साल से कम उम्र के अंडरवेट (उम्र के हिसाब से कम वजन) बच्चों की सूची में भारत की हालत बांग्लादेश, पूर्वी तिमोर और यमन जैसी है.

भारत में नाइजीरिया के मुका़बले ज़्यादा भूखे और कुपोषित लोग हैं. देश की राजधानी दिल्ली की जन वितरण प्रणाली के तहत ज़्यादातर ग़रीब परिवारों के पास राशनकार्ड नहीं हैं. एपीएल कोटे वाले के पास बीपीएल कार्ड हैं. उत्तर प्रदेश एवं महाराष्ट्र में किसान मर रहे हैं, लेकिन इस सबसे बेपरवाह हमारे माननीय मुख्यमंत्रीगण इसी धरती पर स्वर्ग का मजा़ ले रहे हैं.

यह सब कुछ एक ऐसे देश में हो रहा है , जहां का हर तीसरा नागरिक ग़रीब है. ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2009 के आंकडों़ के मुताबिक़, भारत में भूखे एवं कुपोषित लोगों की संख्या पाकिस्तान, नेपाल, सूडान, पेरू, मालावी और मंगोलिया जैसे देशों से भी ज़्यादा है. अंडरवेट बच्चों की सूची में भारत की हालत बांग्लादेश, पूर्वी तिमोर और यमन जैसी है. जन वितरण प्रणाली के तहत ज़्यादातर ग़रीब परिवारों के पास राशनकार्ड नहीं हैं. उत्तर प्रदेश एवं महाराष्ट्र में किसान मर रहे हैं. लेकिन हमारे माननीय मुख्यमंत्रीगण इसी धरती पर स्वर्ग का मजा़ ले रहे हैं.

Saujany-चौथी दुनिया

Saturday, November 27, 2010

कांग्रेस, भारत का अभिशाप..

जब मै बच्चा था तो अक्सर सुनता था की कांग्रेस सरकार घोटालो की सरकार होती है म और जब भी कांग्रेसी सत्ता में आते है देश में महंगाई, भ्रष्टाचार रॉकेट स्पीड से बढ़ जाता है, लेकिन तब मुझे ये बाते समझ में नहीं आती थी, आज जब देश में पिछले छ सालो से कांग्रेस की सरकार है और देश में चारो तरफ अराजकता का बोल बाला है, एक के बाद पडोसी देशो से सम्बन्ध खराब होते जा रहे है, चाइना देश में घुसा आ रहा है और देश की जमीन पर धीरे धीरे कब्जा़ करता आ रहा है, महंगाई तो अभूतपूर्व तरीके से बढती जा रही है और इसके लिए प्रधानमंत्री और उनके सेनापति प्रणव डा के दो पेट संवाद सुन रहा हू
*अन्तराष्ट्रीय महंगाई की वजह से देश में महंगाई बढी़ है
*हम महंगाई पर जल्द काबू पा लेंगे
पहले का जवाब तो ये है की पूरे यूरोप में मैंने पिछले सालो में आर्थिक मंदी की वजह से चीजो के दाम सिर्फ घटते देखे सिर्फ भारत अपवाद रहा जहा मंदी तो आई, लाखो नौकरिया गयी, हा दाम लगातार बढ़ते रहें अब इसकी दूसरी वजह रही जमाखोरी कालाबाजारी और माननीय गृहमंत्री का गेहू और चीनी आयत , निर्यात कारनामा जिसे टुकडो़ के लालच में सरकार का पूरा समर्थन था.
महंगाई तो घटी नहीं इसका इंतजा़र करते करते ६ साल में एक बुजुर्ग पीढी़ जरूर घट गयी होगी,

फिर देखा की किस तरह अफज़ल गुरु, कसाब जैसे देशद्रोहियों को देश का मेहमान बनाया गया , कैसे कांग्रेस के शहपर राज ठाकरे नाम के विछिप्त ने उत्तर भारतीयों के जान तक लेने में संकोच नहीं किया और एक भय, आतंक और गृहयुद्ध जैसा माहौल बना दिया अपने ही देश में लोग बेगाने हो गए..और वोट बैंक के लालच में कांग्रेस ने उसे शह देना जारी रक्खा, देखा की कैसे संवैधानिक मजबूरियों को सोनिया जी के त्याग का नाम देकर और जरखरीद गुलाम मीडिया हाउस को पद्मश्री और विज्ञापन जैसे हड्डी के टुकडे देकर इसे बहुप्रचारित करवाया गया , जिस प्रदेश में उत्तर भारतीयों की जाने जाते वक़्त एक भी पुलिस वाला बाहर नहीं दिखा उसी प्रदेश में एक "हीरो नुमा जीरो " बाबा बहादुर के जाने पर सारी पुलिस और सेना के साथ मुख्यमंत्री तक सडको पर लोट गए.

यहाँ तक तो फिर भी ठीक था फिर कांग्रेस ने शुरू किया वो खेल जो गाँधी परिवार ने बहुत पहले छोटे स्टार पर शुरू किया था , तस्करी और भ्रष्टाचार...शुरुआत शरद पवार जी के गेहू और चीनी घोटाले से हुई लेकिन दूसरी बार पता नहीं एक भ्रष्ट चुनाव आयुक्त और इ वी एम मशीनों की मेहरबानी या जनता की गलती से संप्रग फिर सत्ता में आई हा कुछ बदलावों और खतरनाक इरादों के साथ तो आते ही सत्ता दर्प और भ्रष्टाचार का वो माहौल दिखाया की जनता की रूह काँप जाए..नीरा रादिया, वोर संघवी और बरखा दत्त जैसे दलाल मंत्रिपरिषद बनाने लगे और हमारे कठपुतली प्रधानमंत्री जी बस पूंछ हिलाते रहे..

शुरुआत हुई ७०,००० करोड़ के राष्ट्रमंडल खेलो से जिसे जनता अब कहती है, और तमाम याचिकाओं, शिकायतों के बावजूद सरकार कान में तेल डाले रही क्युकी हिस्सा तो आला कमान से नीचे तक सबको मिल रहा था.. उसके बाद पता लगा की शहीदों की विधवाओं के नाम पर बने फ्लैट को कांग्रेसी नेताओं , मुख्यमंत्री और सेना के अफसरों ने अपने बाप का माल समझ लिया...और सास से लेकर दामाद तक सबको उपकृत किया गया..
उसके बाद आया वो घोटाला जिसने जनता की नेताओं के बारे में विश्वास को हिलाकर रख दिया, भारत के इतिहास का सबसे बडा़ घोटाला जिसने देश के खजाने को १,७६, ००० करोड़ का नुकसान पहुचाया...और अब सबसे नया फर्जी हाऊसिंग लोन घोटाला...और मजे की बात तो ये की कांग्रेस खुद को पाक साफ़ तो कहती है हा जाँच नहीं करना चाहती, और अगर हो भी तो खुद ही करना चाहती है,,क्युकी केन्द्रीय सतर्कता आयुक्त वैसे भी कांग्रेस ने एक आर्थिक अपराधी को ही बनाया है तो चोर चोर मौसेरे भाई...

अंत में इतना ही कहना चाहूँगा की आज इन घोटालो की वजह से देश में चारो तरफ एक अराजकता, एक हताशा का माहौल है, लेकिन कभी कभी लगता है की कही ये तूफा़न के आने के पहले की शांति तो नहीं , कही ऐसा तो नहीं की एक दिन जनता उट्ठे और इन सत्ताधीशो के खिलाफ कानून हाथ में ले ले वैसे बिहार में भ्रष्टाचार का जवाब मिल गया है और शायद आगे भी जनता साबित कर दे की वो बेवकूफ नहीं है...

चलते-चलते ---श्री सुब्रह्मण्यम स्वामी जी के अनुसार 2G घोटाले में ६०,००० करोड़ रिश्वत के तौर पर बनते गए जिसमे से १० संचार मंत्री ए रजा तथा ३०:३०:३० करूणानिधि तथा सोनिया गाँधी की दो बहनों नाडिया और अनुष्का के खाते में गए...

जय हो..

Tuesday, June 8, 2010

गरीब देश के अमीर सच

भारत एक गरीब देश है। यहां गरीबी की सरकारी रेखा के नीचे तीस करोड़ से ज्यादा लोग रहते हैं जितनी इंग्लैंड की आबादी भी नहीं है। कालाहांडी में भूख से हर साल लोग मरते हैं और जो लोग बच जाते हैं वे दूर दूर के शहरों में कहीं रिक्शा चलाते हैं तो कहीं मजदूरी करते हैं।
पर क्या वास्तव में भारत एक गरीब देश है? मैं आपको भारत के साधनों, संसाधनों, संस्कृति और एक जमाने में सोने की चिड़िया वाला प्रवचन देने नहीं जा रहा। आपको एक सच बताना है और वह सच यह है कि अगर काला धन स्विस बैंकों में रखना अगर ओलंपिक या कॉमनवेल्थ का कोई खेल होता तो भारत एक झटके में रूस, अमेरिका और चीन सबको परास्त कर देता।
स्विट्जरलैंड में भारतीय लालाओं और नेताओं का जो काला धन जमा हैं उसकी अगर टॉप 5 की सूची बनाई जाए तो भारत सबसे शिखर पर हैं। अमेरिका तो बेचारा इतना पैसा होने के बावजूद टॉप 5 में नहीं है। वैसे भी अमेरिका के लोग स्विस बैंक की बजाय पाकिस्तान, अफगानिस्तान और इराक पर पैसा खर्च करना ज्यादा पसंद करते है। अच्छी खबर यह है कि बहुत लंबी कसरत के बाद स्विजट्जरलैंड की सरकार भारत के लोगों द्वारा वहां जमा पैसा बताने और शायद वापस करने पर राजी हो गई है। एक मोटे आंकड़े के हिसाब से पंद्रह सौ अरब डॉलर से ज्यादा काला धन विदेशी बैंकों में जमा हैं और यह रकम भारत पर सारे विदेशों कर्जों से तेरह गुना ज्यादा है।
यह रकम मधु कोडा जैसे नेताओं की हैं, भ्रष्ट आईएएस, आईआरएस, आईपीएस और आईएफएस अफसरों की है। आप अगर वीजा और पासपोर्टो की सूची बनाएं तो ये लोग सबसे ज्यादा यात्राएं स्विट्जरलैंड की ही करते हैं और वे सिर्फ वहां की सुंदरता देखने नहीं जाते। अगर यह सारा पैसा वापस आ जाए तो भारत में 45 करोड़ लोगों को एक एक लाख रुपए मिल सकते हैं और गरीबी की सीमा रेखा कब की गायब हो जाएगी। 24 घंटे में हम सारा विदेशी कर्ज उतार सकते हैं और इसके बाद भी हमारे पास अपार पैसा बचा रह जाएगा। सिर्फ इसके ब्याज से भारत का सालाना बजट पेश किया जा सकता हैं।
जाहिर है कि अपने देश में कुछ के पास है तो बहुत हैं और बहुत सारे ऐसे लोग हैं जो भूखे रहने पर मजबूर हैं और उनके बच्चे मजदूरी करते हैं।गरीबी और अमीरी के बीच जो खाई है उस पर पुल बनाने की कोई कोशिश नहीं की गई। क्योंकि अगर पुल बन जाएगा तो भूखे मर रहे लोग इस पार के समाज में आ जाएंगे और जब देखेंगे कि उनकी कीमत पर ये समाज इसके कुछ लोग ऐश कर रहे हैं तो उनकी मुद्रा हमलावर होगी